राजनीतिक प्रतिशोध का मामला, BJP सांसदों जैसी राहत दी जाए: ED गिरफ्तारी के खिलाफ पंजाब मंत्री संजीव अरोड़ा की हाईकोर्ट से मांग
Amir Ahmad
12 May 2026 3:54 PM IST

पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हुई गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और रिमांड आदेश रद्द करने की मांग करते हुए इसे कानून और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और अगली सुनवाई 14 मई के लिए तय की।
संजीव अरोड़ा की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने अदालत में कहा,
“पंजाब में राजनीतिक प्रतिशोध की लड़ाई चल रही है। अदालत ने हाल ही में दो लोगों को राजनीतिक प्रताड़ना से संरक्षण दिया है। मैं सिर्फ दूसरी तरफ हूं। यह राजनीतिक उत्पीड़न का मामला है और मैं उन्हीं के समान राहत चाहता हूं।”
बाली का इशारा आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर BJP में शामिल हुए पूर्व सांसद संदीप पाठक और राजिंदर गुप्ता से जुड़े मामलों की ओर था।
राजिंदर गुप्ता के मामले में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि उनके और उनके परिवार को कोई नुकसान न पहुंचे। वहीं संदीप पाठक के मामले में राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया था कि अदालत की अनुमति के बिना उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।
बाली ने दलील दी कि संजीव अरोड़ा को सुबह 7 बजे गिरफ्तार किया गया, लेकिन गिरफ्तारी के आधार उन्हें शाम 4 बजे उपलब्ध कराए गए।
उन्होंने कहा,
“जब मुझे गिरफ्तार किया गया, तब मेरे पास गिरफ्तारी के आधार मौजूद नहीं थे।”
उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय पुलिस ने अभी जांच शुरू भी नहीं की थी और ED समानांतर जांच शुरू नहीं कर सकती। बाली ने कहा कि अरविंद केजरीवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि हर मामले में गिरफ्तारी जरूरी नहीं होती। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
याचिका में कहा गया कि संजीव अरोड़ा पहले हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के प्रवर्तक और अध्यक्ष थे लेकिन सार्वजनिक पद संभालने के बाद उन्होंने सभी कार्यकारी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया था और कंपनी के दैनिक कामकाज में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
अरोड़ा ने कहा कि कंपनी ने वर्ष 2023-24 से मोबाइल फोन निर्यात का कारोबार शुरू किया और सभी लेनदेन बैंकिंग माध्यमों से तथा वैध दस्तावेजों के आधार पर किए गए।
याचिका के अनुसार कंपनी के संयुक्त अरब अमीरात स्थित फोर्टबेल टेलीकॉम एफजेडसीओ और ड्रैगन ग्लोबल एफजेडसीओ नामक संस्थाओं के साथ लगभग 102.50 करोड़ रुपये के कारोबारी लेनदेन है। अरोड़ा का कहना है कि इन कंपनियों में उनका कोई स्वामित्व या लाभकारी हित नहीं है।
याचिका में कहा गया कि 17 से 19 अप्रैल 2026 के बीच ED ने उनके घर और कार्यालय पर छापेमारी की, लेकिन कोई आपत्तिजनक सामग्री, अघोषित संपत्ति या डिजिटल साक्ष्य बरामद नहीं हुआ। इसके बावजूद उनकी संपत्तियां और बैंक खाते अस्थायी रूप से कुर्क कर दिए गए।
इसके बाद ED की शिकायत पर गुरुग्राम में FIR दर्ज हुई और 5 मई, 2026 को PMLA के तहत ECIR दर्ज की गई। अरोड़ा का आरोप है कि उन्हें FIR की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
याचिका के अनुसार, 9 मई 2026 को ED अधिकारियों ने फिर उनके चंडीगढ़ स्थित आवास पर तलाशी ली, बयान दर्ज किया और उसी दिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अरोड़ा का कहना है कि गिरफ्तारी के आधार अस्पष्ट हैं और उनमें PMLA के तहत अपराध से जुड़ी कोई ठोस सामग्री नहीं बताई गई।
उन्हें उसी रात गुरुग्राम की विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें सात दिन की ED हिरासत में भेज दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि रिमांड आदेश यांत्रिक तरीके से पारित किया गया और PMLA की धारा 19 के तहत जरूरी शर्तों की जांच नहीं की गई।
अरोड़ा ने अदालत से कहा कि पूरा मामला दस्तावेजी लेनदेन से जुड़ा है जिसकी जानकारी पहले से एजेंसियों के पास थी इसलिए हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं थी।
उन्होंने ED की कार्रवाई को मनमाना, पूर्वनियोजित और संवैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन बताते हुए गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार, रिमांड आदेश और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द करने की मांग की।

