गुरुग्राम में जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त, बारिश के पानी का उपयोग न होने पर उपाय बताने के निर्देश

  • गुरुग्राम में जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त, बारिश के पानी का उपयोग न होने पर उपाय बताने के निर्देश

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम में लगातार गहराते जल संकट पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से इसके समाधान के लिए ठोस उपाय सुझाने को कहा। हाईकोर्ट ने कहा कि दशकों से बोरवेल के अंधाधुंध इस्तेमाल के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, जबकि बारिश के दौरान जमा होने वाले पानी का भूजल पुनर्भरण के लिए प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।

    चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ गुरुग्राम में जल संकट से जुड़े कई मामलों की सुनवाई कर रही थी। इनमें सबसे पुरानी याचिका वर्ष 2007 में दायर की गई।

    अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुग्राम लंबे समय से पेयजल की कमी के कारण जल संकट का सामना कर रहा है। बोरवेल के अंधाधुंध इस्तेमाल से कई दशकों में भूजल स्तर लगातार नीचे गया। वहीं, प्राकृतिक जलस्रोतों की संख्या में भी काफी कमी आई और इन जलस्रोतों तक पानी पहुंचाने वाले रास्ते बड़े पैमाने पर अवरुद्ध हैं।

    हाईकोर्ट ने मानसून के दौरान गुरुग्राम में होने वाले जलभराव का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी जमा होने के बावजूद इसका इस्तेमाल गिरते भूजल स्तर को फिर से बढ़ाने के लिए प्रभावी तरीके से नहीं किया जा रहा है।

    अदालत ने कहा कि शोधित पानी के उचित इस्तेमाल और सीवेज शोधन संयंत्रों की प्रभावी कार्यप्रणाली से जुड़ा मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक उचित और प्रभावी उपायों को आक्रामक ढंग से लागू नहीं किया जाता, तब तक स्थिति गंभीर बनी रहने की आशंका है।

    अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के नजदीक होने के कारण गुरुग्राम में शहरीकरण और आबादी का बढ़ना जारी रहना लगभग तय है। ऐसे में जल संकट से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाना और भी जरूरी हो जाता है।

    इससे पहले 19 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण और जल संसाधन मंत्रालय से हलफनामा मांगा। अब प्राधिकरण की ओर से हलफनामा अदालत में दाखिल किया जा चुका है।

    सुनवाई के दौरान सभी पक्षों के वकीलों ने लिखित रूप में समाधान संबंधी सुझाव देने पर सहमति जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि सुझाव 28 सितंबर को बेंच सचिव के समक्ष जमा किए जाएं और उनकी प्रतियां राज्य के वकील अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक बल्यान को भी दी जाएं।

    हाईकोर्ट ने राज्य के वकील को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक गुरुग्राम के उपायुक्त तथा संबंधित सभी विभागों के प्रमुखों से इस मामले में स्पष्ट निर्देश प्राप्त किए जाएं।

    अदालत ने गुरुग्राम के उपायुक्त, याचिकाओं से संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारियों, गुरुग्राम नगर निगम के मुख्य अभियंता, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के संबंधित अधिकारी और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के अधिकारी को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

    मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी।

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