शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, लेकिन इसके नाम पर अदालतों तक लोगों की पहुंच नहीं रोकी जा सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

Amir Ahmad

28 July 2026 12:09 PM IST

  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, लेकिन इसके नाम पर अदालतों तक लोगों की पहुंच नहीं रोकी जा सकती: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

    पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कानूनी सहायता रक्षा अधिवक्ता (LADC) योजना के विरोध में चल रही वकीलों की हड़ताल पर सुनवाई के दौरान कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर लोगों को अदालतों तक पहुंचने और न्याय पाने से वंचित नहीं किया जा सकता।

    एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्र और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा,

    "न्याय तक पहुंच को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि 27 दिनों तक वादकारियों को अदालतों तक पहुंचने से ही रोक दिया जाए।"

    सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्र ने वकीलों की चिंताओं को समझने की बात भी कही।

    उन्होंने कहा,

    "मैं भी उसी पक्ष (बार) से आया हूं। जज होना एक अस्थायी जिम्मेदारी है, हम हमेशा अधिवक्ता ही रहते हैं।"

    LADC योजना का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल है और इस संबंध में न्यायपालिका की भूमिका सीमित है।

    खंडपीठ ने यह भी बताया कि एक दिन पहले रजिस्ट्रार जनरल ने कानूनी सहायता रक्षा अधिवक्ता प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कुछ सिफारिशें जारी की हैं। अदालत ने उम्मीद जताई कि बार इन सिफारिशों पर सकारात्मक विचार करते हुए विवाद का समाधान निकाल लेगा।

    यह टिप्पणी उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि LADC योजना के विरोध में वकीलों की लगातार हड़ताल के कारण पंजाब के वादकारियों को न्याय तक पहुंच से वंचित होना पड़ रहा है।

    हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई के लिए निर्धारित की।

    यह जनहित याचिका एडवोकेट अरविंद सेठ ने दायर की। याचिका में कहा गया कि विभिन्न बार एसोसिएशनों की हड़ताल के कारण पंजाब के जिला अदालतों का कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

    याचिका के अनुसार राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए कानूनी सहायता रक्षा अधिवक्ता (LADC) प्रणाली शुरू की थी। हालांकि पंजाब की कई बार एसोसिएशनों ने इसका विरोध करते हुए दावा किया कि इससे पहले की पैनल अधिवक्ता व्यवस्था के तहत कार्यरत वकीलों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

    याचिका में कहा गया कि इसी विरोध में कई बार एसोसिएशनों ने अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल शुरू की, जिसके चलते जिला अदालतों में मामलों की सुनवाई लगातार प्रभावित हो रही है और वादकारियों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।

    याचिकाकर्ता का तर्क है कि कानून पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वकीलों को न तो हड़ताल करने का कानूनी अधिकार है और न ही अदालतों का बहिष्कार करने का मौलिक अधिकार। ऐसे में अदालतों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने और न्यायिक कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा रोकने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

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