अदालत की अवमानना का नाम सुनकर अफसरों के कांपने वाले दिन अब गए: मद्रास हाईकोर्ट, दो IAS अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी
Amir Ahmad
6 Aug 2026 1:52 PM IST

मद्रास हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों का पालन न करने पर पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के पूर्व निदेशक एस.पी. अमृत और वर्तमान निदेशक एम. कृष्णा उन्नी (दोनों IAS अधिकारी) को अवमानना नोटिस जारी किया।
जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक समय था, जब 'अदालत की अवमानना' शब्द सुनते ही अधिकारियों में भय पैदा हो जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और अदालत के आदेशों की अवहेलना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
अदालत ने कहा,
"वे दिन अब बीत चुके हैं, जब 'अवमानना' शब्द सुनते ही लोगों की रूह कांप जाती थी। पहले अदालत के आदेशों का पालन सामान्य बात थी और अवज्ञा अपवाद। आज स्थिति इससे भी अधिक गंभीर हो गई।"
पीठ ने कहा कि पहले अवमानना मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष खचाखच भरे रहते थे, क्योंकि ऐसे मामले बहुत कम आते थे लेकिन अब अवमानना याचिकाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जस्टिस स्वामीनाथन ने जस्टिस बट्टू देवानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह मद्रास हाईकोर्ट में थे, तब उन्होंने अदालत के आदेशों से किसी भी प्रकार का विचलन स्वीकार नहीं किया और आदेशों के पालन में देरी तक को माफ नहीं किया। अदालत ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों में कानून का सम्मान और अदालत का भय पैदा किया था तथा अन्य न्यायाधीशों को भी उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।
मामला डॉ. सेंथिलकुमार की अवमानना याचिका से जुड़ा है, जो पशुपालन विभाग में पशु चिकित्सा सहायक शल्य चिकित्सक के पद पर कार्यरत हैं।
डॉ. सेंथिलकुमार का जून 2025 में डिंडीगुल से तिरुवन्नामलाई जिले के मल्लावाडी स्थानांतरण किया गया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में उनका तबादला तूतीकोरिन कर दिया गया। उन्होंने इस स्थानांतरण को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर अदालत ने अंतरिम रोक लगाई थी।
अदालत ने कहा कि अंतरिम आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। हालांकि उन्हें तिरुवन्नामलाई जिले में ही समायोजित कर दिया गया। इसके बाद मई 2026 में फिर उनका स्थानांतरण कर दिया गया, जिसे उन्होंने दोबारा चुनौती दी। इस मामले में भी हाईकोर्ट ने 31 जुलाई 2026 तक स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाई थी।
इसके बावजूद अदालत को बताया गया कि डॉ. सेंथिलकुमार को न तो दोबारा कार्यभार ग्रहण करने दिया गया और न ही उनका वेतन जारी किया गया।
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त करने में भी असफल रहे। इस पर अदालत ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब राज्य सरकार के सचिव स्वयं मामले में पक्षकार हों, तब भी इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर है।
अदालत ने कहा,
"अवमानना की कार्यवाही में अदालत की गरिमा का प्रश्न जुड़ा होता है। सरकारी वकीलों का दायित्व अदालत की सहायता करना है। अदालत के आदेशों का जितने अधिक दिनों तक पालन नहीं होता, अदालत की प्रतिष्ठा उतनी ही प्रभावित होती है।"
इन टिप्पणियों के साथ मद्रास हाईकोर्ट ने दोनों IAS अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।


