साक्ष्यों में विरोधाभास, मेडिकल प्रमाण नहीं: पटना हाइकोर्ट ने POCSO मामले में दोषसिद्धि रद्द की
Amir Ahmad
23 March 2026 4:53 PM IST

पटना हाइकोर्ट ने अहम फैसले में अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दी गई सजा रद्द की।
अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास, मेडिकल साक्ष्य का अभाव और स्वतंत्र पुष्टि न होने के कारण अभियोजन का मामला विश्वसनीय नहीं ठहरता।
जस्टिस बिबेक चौधुरी और जस्टिस डॉ. अंशुमान की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे असंगत और अप्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती।
अदालत ने माना कि यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण होती है लेकिन इस मामले में उसके बयान पूरी तरह भरोसेमंद नहीं पाए गए।
कोर्ट ने पाया कि प्रारंभिक शिकायत में केवल अपहरण का आरोप था और दुष्कर्म का आरोप बाद में सामने आया।
महत्वपूर्ण रूप से जब पीड़िता का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज किया गया तब उसने दुष्कर्म का कोई आरोप नहीं लगाया था। बाद में अदालत में दिए गए बयान में सामूहिक दुष्कर्म का आरोप जोड़ दिया गया, जिसे कोर्ट ने गंभीर विरोधाभास माना।
अदालत ने यह भी कहा कि अन्य गवाहों के बयान केवल सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थे और घटना की कोई प्रत्यक्ष पुष्टि नहीं करते।
मेडिकल साक्ष्य के संबंध में कोर्ट ने पाया कि शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं थे। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट में पुराने संबंध के संकेत मिले, जिससे अभियोजन का मामला और कमजोर हुआ।
कोर्ट ने कहा कि यदि तीन लोगों द्वारा कई दिनों तक जबरन दुष्कर्म किया गया होता तो शरीर पर चोट के निशान होना स्वाभाविक था, जो इस मामले में नहीं पाए गए।
इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि पीड़िता की गवाही “पूरी तरह विश्वसनीय नहीं, बल्कि अधिकांशतः अविश्वसनीय” है।
अंततः हाइकोर्ट ने सिद्धांत दोहराया कि यदि साक्ष्यों के आधार पर दो संभावनाएं बनती हैं तो आरोपी के पक्ष में निर्णय देना चाहिए।
इसी आधार पर अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि और सजा रद्द की।

