बिहार उत्पाद अधिनियम | शराब के साथ जब्त किराये की कार की रिहाई पर पटना हाईकोर्ट ने जुर्माना 50% से घटाकर 30% किया
Amir Ahmad
6 Jan 2026 7:51 PM IST

पटना हाईकोर्ट ने लगभग 318 लीटर शराब के साथ जब्त की गई एक किराये की कार की रिहाई के लिए लगाए गए 50 प्रतिशत जुर्माने को घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया। साथ ही न्यायालय ने जुर्माने के अतिरिक्त लगाए गए 3 प्रतिशत शुल्क को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सौरेन्द्र पांडेय की खंडपीठ ने कहा कि वाहन का मालिक इस मामले में अभियुक्त नहीं है और जब्ती से संबंधित आदेशों में सुधार की आवश्यकता है।
न्यायालय ने कहा,
“यह न्यायालय यह उचित और न्यायसंगत समझता है कि दंडादेश में संशोधन करते हुए सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया जाए कि वाहन को उसके बीमित मूल्य के 30 प्रतिशत भुगतान पर रिहा किया जाए।”
मामला दिसंबर 2024 का है, जब दरभंगा में पुलिस ने एक कार को जब्त किया, जिसमें कथित तौर पर लगभग 317.88 लीटर विदेशी शराब बरामद की गई। इस संबंध में बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
दरभंगा के जिलाधिकारी-सह-समाहर्ता ने आदेश दिया कि वाहन को केवल उसके बीमित मूल्य के 50 प्रतिशत के साथ अतिरिक्त 3 प्रतिशत राशि जमा करने पर ही छोड़ा जाएगा, अन्यथा वाहन को जब्त कर लिया जाएगा। इस आदेश को बाद में उत्पाद आयुक्त द्वारा भी बरकरार रखा गया।
हाईकोर्ट के समक्ष वाहन मालिक ने दलील दी कि वह न तो वाहन चला रहा था और न ही जब्ती के समय वाहन में मौजूद था। उसने बताया कि कार को ज़ूमकार प्लेटफॉर्म के माध्यम से वाहन लीज़ समझौते के तहत किराये पर दिया गया। मालिक ने यह भी कहा कि लगाया गया जुर्माना अत्यधिक है और कानून में जुर्माने के अतिरिक्त 3 प्रतिशत राशि वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है।
राज्य सरकार ने शराब की भारी मात्रा का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि समान मामलों में हाईकोर्ट द्वारा जुर्माना 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया।
अतिरिक्त 3 प्रतिशत शुल्क को लेकर न्यायालय ने स्पष्ट कहा,
“जहां तक जुर्माने की राशि के अतिरिक्त 3 प्रतिशत लगाए जाने का प्रश्न है, उसका कानून में कोई आधार नहीं है और वह निरस्त किए जाने योग्य है।”
इसके परिणामस्वरूप, न्यायालय ने अतिरिक्त 3 प्रतिशत शुल्क वाले आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि वाहन को उसके बीमित मूल्य के 30 प्रतिशत भुगतान पर रिहा किया जाए।

