हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित

Amir Ahmad

18 Jun 2026 5:02 PM IST

  • हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित

    चर्चित हनीमून मर्डर केस में मेघालय हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

    करीब 10 दिनों तक चली विस्तृत सुनवाई के बाद जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकलपीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा।

    सोनम रघुवंशी अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी है। उसे इस वर्ष अप्रैल में शिलांग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत से जमानत मिली थी।

    निचली अदालत ने जमानत देते हुए कहा था कि पुलिस ने गिरफ्तारी के आधारों की सही जानकारी सोनम को नहीं दी, जिससे उसके बचाव के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

    अदालत ने पाया था कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में हत्या से संबंधित BNS की धारा 103(1) की जगह गलती से BNS की धारा 403(1) का उल्लेख किया गया।

    शिलांग अदालत ने यह भी कहा था कि किसी भी दस्तावेज में यह नहीं बताया गया कि सोनम को हत्या जैसे गंभीर अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा है। अदालत ने इसे मात्र लिपिकीय त्रुटि मानने से भी इनकार किया था।

    राज्य सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जरनल अमित कुमार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दस्तावेजों में धारा का गलत उल्लेख एक टंकण त्रुटि थी, लेकिन इससे आरोपी को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ।

    उन्होंने कहा कि सोनम को शुरू से ही हत्या के आरोपों की पूरी जानकारी थी। वह गिरफ्तारी ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर चुकी है, रिमांड कार्यवाही में शामिल हुई और इससे पहले तीन जमानत याचिकाएं भी दाखिल कर चुकी है।

    राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब तक आरोपी यह साबित न कर दे कि प्रक्रिया संबंधी त्रुटि से उसे वास्तविक नुकसान हुआ, तब तक ऐसी त्रुटि जमानत का आधार नहीं बन सकती।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस डिएंगडोह ने राज्य सरकार से पूछा कि यदि यह केवल टंकण त्रुटि थी तो वही गलती सभी दस्तावेजों में बार-बार कैसे दोहराई गई।

    इस पर एडवोकेट जनरल ने कहा कि रिमांड आदेश में मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारण मौखिक रूप से बता दिए गए।

    हालांकि अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेज एक तय प्रारूप पर आधारित थे और प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें आरोपी को ठीक तरह से समझाया नहीं गया।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि एक फॉर्म में आरोपी को सेना से भगोड़ा बताने वाला कॉलम भी भरा गया, जिसका इस मामले से कोई संबंध नहीं था।

    राज्य ने यह भी तर्क दिया कि सोनम के फरार होने की आशंका बनी हुई है। इस पर अदालत ने कहा कि जमानत की शर्तें स्पष्ट हैं और यदि वह उनका उल्लंघन करती है तो कानून अपना काम करेगा।

    पूरा मामला

    राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी 12 मई 2025 को हुई थी। शादी के बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय गए और 23 मई को लापता हो गए।

    कुछ दिनों बाद उनकी किराये की स्कूटी सोहरारीम क्षेत्र में लावारिस हालत में मिली। इसके बाद 2 जून को पूर्वी खासी हिल्स जिले के वेसाडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ।

    सोनम 8 जून तक लापता रही और बाद में उत्तर प्रदेश के वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर एक ढाबे के पास मिली।

    जांच के दौरान मेघालय पुलिस ने दावा किया कि सोनम और उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा ने हत्या की साजिश रची थी। पुलिस ने 700 से अधिक पन्नों की आरोपपत्र दाखिल की, जिसमें राज कुशवाहा के अलावा आकाश सिंह राजपूत, विशाल सिंह चौहान और आनंद कुर्मी को भी आरोपी बनाया गया।

    मामले में एडिशनल जिला जज की अदालत हत्या के आरोप तय कर चुकी है। अब सभी की नजरें मेघालय हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रहती है या रद्द की जाती है।

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