महिला की गरिमा उसके आश्रय से जुड़ी है: मद्रास हाईकोर्ट का सख्त आदेश, तोड़ा गया घर फिर से बनाने का निर्देश
Amir Ahmad
23 April 2026 12:16 PM IST

मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि किसी महिला की गरिमा उसके रहने के अधिकार से गहराई से जुड़ी होती है। अदालत ने अवैध रूप से तोड़े गए घर के मामले में न केवल मुआवजा देने का आदेश दिया, बल्कि आरोपियों को तुरंत घर पुनर्निर्माण करने के निर्देश भी दिए।
जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी ने कहा,
“महिला की गरिमा उसके आश्रय के अधिकार से अविभाज्य रूप से जुड़ी है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीने और रहने का अधिकार भी शामिल है।”
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,
"घर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं होता बल्कि यह एक महिला के लिए सम्मान और सुरक्षा का अंतिम सहारा होता है। जब इसे कानून के बजाय प्रभाव के दम पर तोड़ा जाता है तो यह केवल एक नागरिक गलती नहीं बल्कि संवैधानिक चोट है।”
मामला वी. मलार नाम की महिला की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने आरोप लगाया कि मदुरै जिले के उसिलमपट्टी क्षेत्र में उनकी जमीन पर पड़ोसी व्यक्ति ने अतिक्रमण कर घर गिरा दिया। महिला ने बताया कि उन्होंने पहले भी पुलिस को शिकायत दी थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अदालत ने पाया कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह अवैध थी और यहां तक कि वास्तविक मालिक भी किसी को कानून की प्रक्रिया के बिना बेदखल नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब विवाद की जानकारी थी तब शांति बनाए रखने और संपत्ति की रक्षा करना पुलिस का कर्तव्य था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। इस पर हाइकोर्ट ने जांच को चार सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।
साथ ही अदालत ने कहा कि इस तरह की गुंडागर्दी करने वालों को पीड़ित महिला को उचित मुआवजा देना होगा और उसके घर को तत्काल पुनः निर्मित करना होगा।

