माता-पिता या 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति ही सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत शिकायत कर सकते हैं: मद्रास हाईकोर्ट
Amir Ahmad
13 Aug 2026 5:08 PM IST

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता या 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके व्यक्ति ही माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत शिकायत दाखिल कर सकते हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतकर्ता न तो संबंधित व्यक्ति का माता-पिता है और न ही उसकी उम्र 60 वर्ष पूरी हुई है, तो इस कानून के तहत उसकी शिकायत सुनने का अधिकारियों के पास अधिकार क्षेत्र नहीं होगा।
जस्टिस एम. धंडपानी ने यह टिप्पणी करते हुए कन्याकुमारी के जिला कलेक्टर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिकायतकर्ता को हर महीने 6,000 रुपये भरण-पोषण के रूप में देने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने पाया कि शिकायत दाखिल करने के समय महिला की उम्र 60 वर्ष से कम थी और वह याचिकाकर्ता दंपति की माता-पिता भी नहीं थी।
मामला एक पति-पत्नी की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने जिला कलेक्टर के आदेश को चुनौती दी थी। शिकायतकर्ता पत्नी की मौसी की बेटी थी। उसने अपनी मां और मामा के साथ मिलकर याचिकाकर्ता दंपति के पक्ष में समझौता विलेख के माध्यम से संपत्ति हस्तांतरित की थी।
बाद में शिकायतकर्ता ने राजस्व मंडल अधिकारी के समक्ष आवेदन देकर समझौता विलेख रद्द करने की मांग की। राजस्व मंडल अधिकारी ने विलेख रद्द करने से इनकार कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला कलेक्टर के समक्ष अपील की।
जिला कलेक्टर ने भी समझौता विलेख रद्द करने से इनकार कर दिया, लेकिन साथ ही दंपति को शिकायतकर्ता को हर महीने 6,000 रुपये भरण-पोषण के रूप में देने का निर्देश दिया। इस आदेश के खिलाफ दंपति ने हाईकोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि राजस्व मंडल अधिकारी के समक्ष दाखिल शिकायत और जिला कलेक्टर के समक्ष अपील ही सुनवाई योग्य नहीं थी, क्योंकि शिकायतकर्ता सीनियर सिटीजन एक्ट के दायरे में नहीं आती थी। दंपति ने बताया कि संबंधित समय पर शिकायतकर्ता की उम्र केवल 57 वर्ष थी और वह न तो सीनियर सिटीजन थी और न ही उनकी माता-पिता।
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि कानून में सीनियर सिटीजन की परिभाषा के तहत आने के लिए शिकायतकर्ता की उम्र कम से कम 60 वर्ष होनी चाहिए। शिकायत दाखिल करने के समय महिला ने 60 वर्ष की आयु पूरी नहीं की थी।
अदालत ने कहा,
“शिकायत दाखिल करने की तारीख पर दूसरी प्रतिवादी की उम्र 60 वर्ष पूरी नहीं हुई थी और इसलिए वह 2007 के अधिनियम के तहत 'वरिष्ठ नागरिक' की परिभाषा में नहीं आती थी। वह याचिकाकर्ताओं की माता-पिता भी नहीं थी। ऐसी परिस्थितियों में शिकायत स्वयं सुनवाई योग्य नहीं थी और अधिकारियों के पास उसे सुनने का अधिकार क्षेत्र नहीं था।”
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने भी याचिकाकर्ताओं की दलील स्वीकार की और अदालत से 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद नए सिरे से कार्यवाही शुरू करने की स्वतंत्रता मांगी। उसने कहा कि उसने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में मूल्यवान संपत्ति हस्तांतरित की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने शिकायत दाखिल करने के समय 60 वर्ष की आयु पूरी नहीं की थी और वह याचिकाकर्ताओं की माता-पिता भी नहीं थी। इसलिए राजस्व मंडल अधिकारी और जिला कलेक्टर, दोनों के पास सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत शिकायत और अपील पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र नहीं था।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए जिला कलेक्टर का आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत ने शिकायतकर्ता को राहत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया और उसे 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नई शिकायत दाखिल कर अपना कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।


