धर्म त्यागे बिना 'नो कास्ट, नो रिलीजन' प्रमाणपत्र नहीं मिल सकता: मद्रास हाइकोर्ट
Amir Ahmad
24 Feb 2026 4:32 PM IST

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने हाल ही में एक व्यक्ति की नो कास्ट, नो रिलीजन प्रमाणपत्र जारी करने की मांग खारिज की।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित व्यक्ति विधि सम्मत रीति-रिवाजों के अनुसार अपना धर्म त्याग नहीं करता, तब तक ऐसा प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता।
जस्टिस कृष्णन रामासामी ने कहा,
“जब तक याचिकाकर्ता हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अपना धर्म त्याग नहीं करता, तब तक उसके अनुरोध पर विचार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में इस प्रकार का प्रमाणपत्र जारी करने का प्रश्न ही नहीं उठता।”
पूरा मामला
मामला चेळ्लामनिक्कम नामक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने सिवगंगई जिले के तिरुप्पथुर तालुक के तहसीलदार द्वारा उसकी अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती दी। याचिकाकर्ता के माता-पिता हिंदू धर्म से संबंधित हैं।
याचिकाकर्ता ने “नो कास्ट, नो रिलीजन” प्रमाणपत्र की मांग की, लेकिन तहसीलदार ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि इसके लिए कोई शासकीय आदेश उपलब्ध नहीं है।
राज्य का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वर्तमान में ऐसा कोई सरकारी आदेश नहीं है, जिसके आधार पर “नो कास्ट, नो रिलीजन” प्रमाणपत्र जारी किया जा सके। इसलिए याचिकाकर्ता का आवेदन नियमों के अनुरूप ही खारिज किया गया।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उसने अपना धर्म औपचारिक रूप से त्याग दिया। इस पर याचिकाकर्ता ने नकारात्मक उत्तर दिया।
अदालत ने कहा कि बिना धर्म त्यागे “नो कास्ट, नो रिलीजन” प्रमाणपत्र की मांग नहीं की जा सकती। यदि धर्म त्याग का कोई प्रमाण ही नहीं है, तो अधिकारियों को प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
आगे का रास्ता
हालांकि, हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह विधि अनुसार अपना धर्म त्याग कर संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करे और फिर से आवेदन करे।
अदालत ने कहा कि यदि ऐसा किया जाता है तो अधिकारी प्रचलित नियमों के अनुसार आवेदन पर विचार करें और आवश्यकता होने पर उपयुक्त नियम बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।
इस प्रकार अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि केवल घोषणा कर देने से “नो कास्ट, नो रिलीजन” प्रमाणपत्र नहीं मिल सकता, बल्कि इसके लिए विधिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

