मुवक्किल के निर्देश पर दिए बयान पर वकील पर मानहानि नहीं: मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला
Amir Ahmad
9 April 2026 3:07 PM IST

मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई वकील अपने मुवक्किल के निर्देश पर दिए गए बयानों के लिए मानहानि के मामले में अभियोजन का सामना नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि वकील केवल अपने मुवक्किल की ओर से बोलता है और तथ्यों की सत्यता की स्वतंत्र जांच करने की स्थिति में नहीं होता।
जस्टिस जी.के. इलंथिरैयन ने कहा,
“वकील मुवक्किल के निर्देशों के आधार पर ही कार्य करता है। ऐसे में उन बयानों की जिम्मेदारी मुवक्किल की होती है, न कि वकील की। इसके विपरीत कोई भी दृष्टिकोण वकीलों को प्राप्त कानूनी विशेषाधिकारों के खिलाफ होगा।”
यह मामला एक वकील द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने तिरुवल्लूर की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में उसके खिलाफ दर्ज मानहानि का आपराधिक मामला रद्द करने की मांग की थी। यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 और 109 के तहत दर्ज किया गया।
शिकायत पति द्वारा दर्ज कराई गई, जिसमें उसने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी और उसके वकील ने उसके खिलाफ झूठे यौन उत्पीड़न के आरोप फैलाए। पति का कहना था कि उसने पहले विवाह को शून्य घोषित कराने के लिए मामला दायर किया, जिसके जवाब में पत्नी ने प्रतिशोध में यह कदम उठाया।
पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी ने वकील की मदद से अपनी नाबालिग बेटी के माध्यम से POCSO Act के तहत शिकायत दर्ज कराई और मीडिया में झूठी जानकारी फैलाई। हालांकि, बाद में महिला अदालत द्वारा जांच के बाद उस शिकायत को खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने पाया कि वकील को केवल इसलिए आरोपी बनाया गया, क्योंकि उसने अपने मुवक्किल की ओर से पैरवी की थी। अदालत ने इसे “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” करार दिया।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ चल रहे मानहानि का मामला रद्द कर दिया।
हालांकि, पत्नी के मामले में अदालत ने कहा कि उसके खिलाफ विशिष्ट आरोप हैं, इसलिए उसके खिलाफ कार्यवाही जारी रहेगी। हाईकोर्ट ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया।

