80 दिन काम की शर्त बताकर मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं कर सकता राज्य: एमपी हाईकोर्ट

Amir Ahmad

6 April 2026 6:02 PM IST

  • 80 दिन काम की शर्त बताकर मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं कर सकता राज्य: एमपी हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने संस्थानों में कार्यरत महिलाओं को 80 दिन काम की शर्त का हवाला देकर मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य का दायित्व है कि वह महिलाओं के लिए कल्याणकारी उपाय सुनिश्चित करे।

    जस्टिस विशाल धगट की पीठ ने कहा,

    “मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 5(2) में 80 दिन काम करने की शर्त का प्रावधान है, लेकिन यह शर्त राज्य सरकार के संस्थानों पर लागू नहीं होगी। राज्य को अपने नागरिकों के लिए कल्याणकारी कदम उठाने होंगे।”

    मामला अतिथि संकाय (गेस्ट फैकल्टी) से जुड़ा था, जिसने 16 जून, 2023 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में उसे छह माह का मातृत्व अवकाश तो दिया गया लेकिन मानदेय (भुगतान) से वंचित कर दिया गया।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि वह अनुसूचित जाति वर्ग से होने के कारण उत्पीड़न का शिकार हो रही है।

    अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर कार्यरत थी, इसलिए उस पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम लागू नहीं होते। इसके बावजूद, अदालत ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि क्या मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 उसके मामले में लागू होगा।

    हाईकोर्ट ने कहा कि अधिनियम की धारा 2(1) का दायरा व्यापक है और इसमें सरकारी संस्थान भी आते हैं। इसलिए याचिकाकर्ता इस कानून के तहत लाभ पाने की हकदार है।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्यतः मातृत्व लाभ पाने के लिए 12 महीनों में 80 दिन काम करने की शर्त होती है लेकिन संविधान की भावना को ध्यान में रखते हुए इस शर्त को राज्य के संस्थानों में कठोर रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वह श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करे और कल्याणकारी नीतियां अपनाए।

    अंततः हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को मातृत्व अवकाश के साथ-साथ संबंधित लाभ भी प्रदान किए जाएं।

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