नाबालिग यदि स्वयं घर छोड़कर जाए तो साथ जाने मात्र से अपहरण नहीं बनता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
Amir Ahmad
6 May 2026 5:23 PM IST

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई नाबालिग अपनी इच्छा से घर छोड़कर जाती है और कोई वयस्क केवल उसके साथ जाता है तो मात्र इस आधार पर उसे वैध अभिभावक की अभिरक्षा से अपहरण का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
जस्टिस प्रदीप मित्तल की पीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 361 के तहत ले जाना या बहलाकर साथ ले जाना सिद्ध करने के लिए आरोपी की ओर से कोई सक्रिय और सकारात्मक कृत्य होना आवश्यक है।
अदालत ने कहा,
“धारा 361 में प्रयुक्त 'ले जाना' शब्द का अर्थ है आरोपी द्वारा ऐसा स्वैच्छिक और जानबूझकर किया गया सक्रिय कार्य, जिससे नाबालिग अभिभावक की अभिरक्षा से बाहर जाए। यदि नाबालिग स्वयं अपनी इच्छा से साथ जाती है और आरोपी केवल उसे साथ आने देता है तो यह 'ले जाना' नहीं माना जाएगा।”
मामला उस अपील से संबंधित था, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को नाबालिग लड़की के अपहरण के आरोप में तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
अभियोजन के अनुसार वर्ष 2013 में नाबालिग लड़की आरोपी के साथ घर से चली गई। हालांकि, ट्रायल के दौरान पीड़िता ने स्वयं बयान दिया कि वह अपनी इच्छा से घर से निकली थी अपनी मां को बताकर गई और आरोपी के साथ स्वेच्छा से गई।
उसने यह भी कहा कि आरोपी ने न तो बल प्रयोग किया, न दबाव डाला और न ही कोई अनुचित कृत्य किया।
इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आरोपी को दोषी ठहराया कि चूंकि पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति विधिक रूप से महत्वहीन है।
हाईकोर्ट ने इस दृष्टिकोण को गलत ठहराते हुए कहा कि नाबालिग की सहमति भले विधिक रूप से अप्रासंगिक हो, लेकिन अभियोजन को यह अलग से साबित करना ही होगा कि आरोपी ने उसे “ले गया” या “प्रलोभन देकर साथ ले गया”।
पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने दो अलग-अलग कानूनी सिद्धांतों को आपस में मिला दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया,
“नाबालिग की सहमति का अप्रासंगिक होना इस मूल तत्व की कमी को पूरा नहीं कर सकता कि आरोपी ने वास्तव में उसे 'ले गया' या 'प्रलोभन दिया' हो।”
रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने पाया कि लड़की स्वयं घर से निकली थी और स्वेच्छा से आरोपी के साथ गई, इसलिए धारा 361/363 के तहत अपराध सिद्ध नहीं होता।
इसी आधार पर अदालत ने आरोपी की दोषसिद्धि रद्द करते हुए अपील स्वीकार की।

