सिर्फ आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का पर रोक नहीं लगाई जा सकती, लाउंज के खिलाफ कार्रवाई पर रोक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Amir Ahmad

17 Jun 2026 4:28 PM IST

  • सिर्फ आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का पर रोक नहीं लगाई जा सकती, लाउंज के खिलाफ कार्रवाई पर रोक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि केवल संभावित दुरुपयोग की आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने 'द हाई ट्राइब' नामक लाउंज को राहत देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उसके खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न करें, बशर्ते वहां केवल तंबाकू और निकोटिन रहित हर्बल हुक्का ही परोसा जाए और सभी कानूनी नियमों का पालन किया जाए।

    जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने कहा कि संबंधित कानूनों का उद्देश्य तंबाकू और उससे जुड़े पदार्थों के सेवन एवं धूम्रपान पर नियंत्रण करना है। इन प्रावधानों का दायरा उन हर्बल उत्पादों तक नहीं बढ़ाया जा सकता जिनमें न तो तंबाकू हो और न ही निकोटिन।

    अदालत ने कहा कि यदि यह साबित करने के लिए कोई ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं है कि संबंधित प्रतिष्ठान में तंबाकूयुक्त हुक्का परोसा जा रहा है, तो केवल आशंका के आधार पर उस पर पूर्ण रोक लगाना उचित नहीं होगा।

    हाईकोर्ट ने टिप्पणी की,

    “तंबाकू आधारित हुक्का परोसे जाने का कोई ठोस प्रमाण न होने की स्थिति में केवल संभावित दुरुपयोग की आशंका, बिना किसी स्पष्ट निष्कर्ष या निरीक्षण में उल्लंघन पाए जाने के, हर्बल हुक्का पर वास्तविक रूप से पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आधार नहीं बन सकती।”

    याचिकाकर्ता लाउंज ने अदालत को बताया कि उसके यहां 30 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था है तथा धूम्रपान और गैर-धूम्रपान क्षेत्रों को नियमों के अनुसार अलग-अलग रखा गया। लाउंज का कहना था कि वह केवल हर्बल, तंबाकू-मुक्त और निकोटिन-मुक्त हुक्का परोसता है तथा परिसर में किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पाद की बिक्री या उपयोग की अनुमति नहीं है।

    लाउंज ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उसे बंद करने और लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी थी, जबकि ऐसा करने के लिए कोई स्पष्ट वैधानिक प्रतिबंध मौजूद नहीं है।

    दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि हुक्का लाउंजों का इस्तेमाल कई बार प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन के लिए किया जाता है। इसी वजह से कानून में संशोधन कर ऐसे प्रतिष्ठानों पर निगरानी बढ़ाई गई।

    मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मुख्य प्रश्न तय किया कि क्या किसी स्पष्ट कानूनी प्रतिबंध के अभाव में केवल आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का परोसने वाले प्रतिष्ठान पर पूर्ण रोक लगाई जा सकती है।

    अदालत ने कहा कि कानून में हुक्का बार की परिभाषा मुख्य रूप से उन स्थानों के लिए है, जहां तंबाकू या उससे मिलते-जुलते पदार्थों का सेवन कराया जाता है। यह परिभाषा तंबाकू और निकोटिन से रहित हर्बल उत्पादों को स्वतः अपने दायरे में नहीं लाती।

    हाईकोर्ट ने यह भी माना कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी वैध व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के लिए उचित कानूनी आधार होना आवश्यक है। संविधान के तहत व्यापार करने की स्वतंत्रता पर लगाया गया प्रतिबंध तर्कसंगत और कानून सम्मत होना चाहिए।

    अदालत ने लाउंज को कई शर्तों के साथ राहत दी। आदेश के अनुसार, प्रतिष्ठान में किसी भी स्थिति में तंबाकू, निकोटिन, मादक पदार्थ या अन्य प्रतिबंधित सामग्री का भंडारण, उपयोग या प्रचार नहीं किया जा सकेगा। धूम्रपान और गैर-धूम्रपान क्षेत्रों का स्पष्ट पृथक्करण बनाए रखना होगा तथा सभी सुरक्षा और लाइसेंस संबंधी नियमों का पालन करना होगा।

    साथ ही, अधिकारियों को यह स्वतंत्रता दी गई कि वे किसी भी उचित समय पर निरीक्षण कर नियमों के पालन की जांच कर सकते हैं। यदि किसी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है तो कानून के अनुसार लाइसेंस निलंबन, रद्दीकरण या अन्य कार्रवाई की जा सकेगी।

    इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल संभावित दुरुपयोग की आशंका के आधार पर किसी प्रतिष्ठान को हर्बल, तंबाकू-मुक्त और निकोटिन-मुक्त हुक्का परोसने से नहीं रोका जा सकता।

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