रक्षा और सुरक्षा परियोजनाओं के लिए पेड़ काटने पर पूर्व अनुमति जरूरी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Amir Ahmad
16 May 2026 2:06 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय सेना को राहत देते हुए स्पष्ट किया कि रक्षा और सुरक्षा संबंधी अधोसंरचना परियोजनाओं पर पेड़ काटने के लिए पूर्व अनुमति संबंधी उसका पुराना आदेश लागू नहीं होगा, यदि संबंधित भूमि वन संरक्षण अधिनियम की धारा 1ए के तहत छूट प्राप्त श्रेणी में आती है।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में संशोधन के बाद सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं को विशेष छूट दी गई। इसलिए 26 नवंबर 2025 को पारित आदेश को उसी सीमा तक लागू माना जाएगा, जहां अधिनियम में छूट का प्रावधान नहीं है।
अदालत ने कहा,
“वन संरक्षण अधिनियम सुरक्षा संबंधी अधोसंरचना परियोजनाओं को अपवाद के रूप में मान्यता देता है। इसलिए 26 नवंबर 2025 का आदेश उन श्रेणियों की भूमि पर लागू नहीं होगा, जिन्हें धारा 1ए के तहत विशेष रूप से छूट दी गई।”
मामला भारतीय सेना की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। सेना ने कहा था कि हाइकोर्ट के पूर्व आदेश के कारण सुरक्षा संबंधी निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उस आदेश में राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा गठित समिति और संबंधित वृक्ष अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना पेड़ काटने, छंटाई या परिवहन पर रोक लगा दी गई थी।
सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से पेश डिप्टी-एडवोकेट जनरल ने अदालत का ध्यान वन संरक्षण अधिनियम की धारा 1ए और धारा 4 की ओर दिलाया। उन्होंने कुछ दस्तावेज बंद लिफाफे में भी अदालत को सौंपे।
हाईकोर्ट ने याचिका पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि जिन श्रेणियों की भूमि को अधिनियम में छूट दी गई, वहां पूर्व अनुमति की शर्त लागू नहीं होगी।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला एक स्वत: संज्ञान याचिका से शुरू हुआ था। अदालत ने एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर संज्ञान लिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि लोक निर्माण विभाग ने आवश्यक अनुमति के बिना 488 पेड़ काट दिए।
उस समय हाईकोर्ट ने सार्वजनिक परियोजनाओं में पेड़ों की कटाई को न्यूनतम रखने संबंधी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए पूरे मध्य प्रदेश में बिना पूर्व अनुमति पेड़ काटने, छंटाई करने या परिवहन पर रोक लगाई थी।

