शराब कारोबारी की आत्महत्या मामले में CBI जांच के आदेश, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने FIR में देरी पर पुलिस को फटकार

Amir Ahmad

15 May 2026 5:06 PM IST

  • शराब कारोबारी की आत्महत्या मामले में CBI जांच के आदेश, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने FIR में देरी पर पुलिस को फटकार

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शराब कारोबारी की आत्महत्या मामले में बड़ा आदेश देते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी FIR दर्ज करने में जानबूझकर देरी करते दिखे और ऐसा प्रतीत होता है कि वे आबकारी अधिकारी के प्रभाव में काम कर रहे थे।

    जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने कहा कि मृतक द्वारा छोड़े गए वीडियो सुसाइड नोट में जिन रकमों का उल्लेख किया गया, वे बेहद बड़ी हैं और आत्महत्या से पहले वीडियो रिकॉर्ड किया जाना मामले को गंभीर बनाता है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

    मामला शराब कारोबारी दिनेश मकवाना की आत्महत्या से जुड़ा है। उनकी मां ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि देवास में तैनात तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त द्वारा लगातार रिश्वत की मांग और प्रताड़ना के कारण उनके बेटे ने 8 नवंबर 2025 को सेल्फोस खाकर आत्महत्या कर ली।

    याचिका के अनुसार, मकवाना ने आत्महत्या से पहले वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने आरोप लगाया कि आबकारी अधिकारी हर शराब दुकान से प्रति माह डेढ़ लाख रुपये मांगता था और हर बोतल पर 10 रुपये कमीशन भी चाहता था।

    वीडियो में मृतक ने कहा था कि वह पहले ही 20 से 22 लाख रुपये दे चुका है, लेकिन कारोबार में घाटे के कारण आगे भुगतान करने में असमर्थ था। उसने यह भी आरोप लगाया कि भुगतान नहीं करने पर गोदाम से शराब की सप्लाई रोकी जा रही थी।

    अदालत ने पाया कि 29 नवंबर 2025 को सुसाइड नोट संबंधित थाने को सौंपे जाने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। केवल एक साइबर फोरेंसिक रिपोर्ट हासिल की गई, जिसमें कहा गया कि यह सत्यापित नहीं किया जा सकता कि वीडियो उसी मोबाइल से बनाया गया था या नहीं।

    हाईकोर्ट ने कहा,

    “इस अदालत की राय में संबंधित पुलिस थाना और वरिष्ठ अधिकारियों की FIR दर्ज करने में दिखाई गई बेचैनी इस मामले में अदालत के हस्तक्षेप को आवश्यक बनाती है।”

    अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दिनेश मकवाना की आत्महत्या और वीडियो सुसाइड नोट को दबाने की कोशिश की जा रही थी।

    वहीं आरोपी आबकारी अधिकारी की ओर से कहा गया कि वीडियो से छेड़छाड़ की गई और वह एडिटिड है। यह भी दलील दी गई कि कारोबारी पहले से 34 लाख रुपये के आबकारी बकाये के दबाव में था और लाइसेंस रद्द होने की आशंका से परेशान था।

    राज्य सरकार की ओर से भी फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि वीडियो किसी अन्य उपकरण से मोबाइल में स्थानांतरित किया गया।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर वीडियो सुसाइड नोट को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि आरोप गंभीर हैं और निष्पक्ष जांच स्थानीय पुलिस से संभव नहीं दिखती।

    इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपते हुए FIR दर्ज कर कानून के अनुसार जांच शुरू करने का आदेश दिया।

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