अंतरधार्मिक विवाह को अपराध साबित करने के लिए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने का आरोप: हाईकोर्ट पहुंची कुंभ की वायरल गर्ल 'मोनालिसा'

Amir Ahmad

19 May 2026 3:40 PM IST

  • अंतरधार्मिक विवाह को अपराध साबित करने के लिए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने का आरोप: हाईकोर्ट पहुंची कुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा

    महाकुंभ मेले के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुईं मोनालिसा भोसले ने अपने पति फरमान के साथ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया। दंपति ने आरोप लगाया कि उनके अंतरधार्मिक विवाह को अपराध साबित करने के लिए मोनालिसा का जन्म प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से बदला गया।

    याचिका में अदालत से मोनालिसा का मूल जन्म प्रमाणपत्र बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित जालसाजी की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई।

    मोनालिसा भोसले पिछले वर्ष महाकुंभ के दौरान रुद्राक्ष की माला बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसके बाद उन्हें देशभर में पहचान मिली।

    याचिका के अनुसार, केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उसकी मुलाकात फरमान से हुई थी। दोनों के बीच संबंध बने और मार्च 2026 में उन्होंने विवाह कर लिया।

    बाद में यह मामला विवादों में आ गया, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कथित तौर पर पाया कि विवाह के समय मोनालिसा की उम्र लगभग 16 वर्ष थी और शादी के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने फरमान के खिलाफ POCSO कानून के तहत मामला दर्ज किया।

    हालांकि, 20 अप्रैल 2026 को केरल हाईकोर्ट ने फरमान की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कहा था कि दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि मोनालिसा के पिता विवाह के खिलाफ हैं और उन्होंने साजिश के तहत उनके जन्म रिकॉर्ड में हेरफेर कर उन्हें नाबालिग दिखाने की कोशिश की।

    याचिका में कहा गया कि जन्म प्रमाणपत्र में गलत तरीके से बदलाव किए गए और मोनालिसा की वास्तविक जन्मतिथि बदल दी गई। साथ ही उनका असली जन्म प्रमाणपत्र बिना किसी नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के सरकारी पोर्टल से रद्द कर दिया गया।

    दंपति ने अदालत को बताया कि अपहरण की FIR भी इसी कथित साजिश के तहत दर्ज कराई गई ताकि विवाह को आपराधिक रंग दिया जा सके।

    याचिका में कहा गया,

    “FIR कोई वास्तविक आपराधिक शिकायत नहीं है, बल्कि वैध विवाह के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर याचिकाकर्ताओं को परेशान और आपराधिक रूप से फंसाने का प्रयास किया गया।”

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि मोनालिसा के पिता और अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर फरमान के खिलाफ भड़काऊ प्रचार किया और “लव जिहाद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर विवाह को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की।

    दंपति ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई संविधान में प्रदत्त जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा और अपनी पसंद से विवाह करने के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

    इसी आधार पर मोनालिसा भोसले ने हाईकोर्ट से जन्म प्रमाणपत्र बहाल करने, सरकारी रिकॉर्ड में कथित जालसाजी की जांच कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच के निर्देश देने की मांग की।

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