भोजशाला विवाद में केंद्र का बड़ा दावा: नमाज़ की अनुमति वाला 1935 का नोटिफिकेशन वैध नहीं

Amir Ahmad

4 May 2026 6:19 PM IST

  • भोजशाला विवाद में केंद्र का बड़ा दावा: नमाज़ की अनुमति वाला 1935 का नोटिफिकेशन वैध नहीं

    भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद विवाद में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को बताया कि वर्ष 1935 में धार रियासत द्वारा जारी वह अधिसूचना, जिसके आधार पर मुस्लिम पक्ष नमाज़ के अधिकार का दावा करता है विधिक रूप से वैध नहीं है।

    मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष हुई।

    केंद्र और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने दलील दी कि भोजशाला को वर्ष 1904 में ही संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका है, इसलिए उसके बाद धार रियासत को उस स्थल की स्थिति बदलने या धार्मिक अधिकार प्रदान करने का कोई अधिकार नहीं है।

    उन्होंने अदालत से कहा,

    “जब संपत्ति 1904 से संरक्षित स्मारक थी, तब धार रियासत के पास ऐसी अधिसूचना जारी करने की शक्ति ही नहीं है।”

    केंद्र ने ऐतिहासिक अभिलेखों और पुरातत्व विभाग के दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि स्थल का संरक्षण और रखरखाव लंबे समय से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन रहा है।

    केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2003 में ASI द्वारा हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज़ की अनुमति देने संबंधी आदेश केवल अंतरिम व्यवस्था थी।

    यह विवाद 11वीं सदी के संरक्षित स्मारक भोजशाला को लेकर है, जिसे हिंदू पक्ष मां वाग्देवी/सरस्वती का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है।

    मामले में दायर याचिकाओं में स्थल का वैज्ञानिक सर्वे कराने, हिंदू पक्ष को स्थल सौंपने तथा परिसर में नमाज़ पर रोक लगाने की मांग की गई।

    सर्वे रिपोर्ट पर आपत्तियों सहित मामले की आगे सुनवाई मंगलवार को जारी रहेगी।

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