महो सत्र न्यायालय में अतिरिक्त लोक अभियोजक की नई नियुक्ति का रास्ता साफ, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 8 सप्ताह में प्रक्रिया शुरू करने को कहा

Amir Ahmad

14 Sept 2026 5:34 PM IST

  • महो सत्र न्यायालय में अतिरिक्त लोक अभियोजक की नई नियुक्ति का रास्ता साफ, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 8 सप्ताह में प्रक्रिया शुरू करने को कहा

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इंदौर जिले के महो स्थित एडिशनल सेशन जज की अदालत में अतिरिक्त लोक अभियोजक की नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने स्पष्ट किया कि विभागीय नियमावली में किसी नियुक्ति की अवधि अधिकतम तीन वर्ष बताए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हर नियुक्ति तीन साल के लिए ही होगी। इसका अर्थ केवल यह है कि नियुक्ति अधिकतम तीन साल तक की अवधि के लिए की जा सकती है।

    मामले में याचिकाकर्ता ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अतिरिक्त सचिव की ओर से 21 अप्रैल 2023 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत प्रतिवादी नंबर 6 को डॉ. आंबेडकर नगर (महो), जिला इंदौर स्थित एडिशनल सेशन जज की अदालत में अतिरिक्त लोक अभियोजक नियुक्त किया गया।

    याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद भी संबंधित व्यक्ति बिना किसी वैध अधिकार के सहायक शासकीय अधिवक्ता के रूप में अदालत में पेश हो रहा है। इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई करने और पद रिक्त होने के कारण नई नियुक्ति करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई।

    राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि संबंधित व्यक्ति की नियुक्ति एक साल के लिए नहीं, बल्कि तीन साल के लिए थी। विभागीय नियमावली की धारा 20 का हवाला देते हुए कहा गया कि लोक अभियोजक, शासकीय वकील, अतिरिक्त लोक अभियोजक या अतिरिक्त शासकीय वकील की नियुक्ति की अवधि परिवीक्षा अवधि को छोड़कर तीन साल से अधिक नहीं हो सकती।

    हाईकोर्ट ने नियुक्ति आदेश की भाषा का परीक्षण करते हुए कहा कि आदेश में नियुक्ति स्पष्ट रूप से एक वर्ष या संबंधित उम्मीदवार के 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, के लिए की गई थी। इसलिए एक वर्ष की अवधि समाप्त हो जाने के बाद उस आदेश को तीन साल की नियुक्ति मानकर चुनौती को सही नहीं ठहराया जा सकता।

    पीठ ने विभागीय नियमावली के संबंध में राज्य की दलील को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संबंधित विभागीय नियमावली को कोई वैधानिक दर्जा प्राप्त है या नहीं। इसके अलावा, धारा 20 में यह कहा गया है कि ऐसी नियुक्ति तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि प्रत्येक नियुक्ति तीन वर्ष की अवधि के लिए ही मानी जाएगी। इसका अर्थ केवल इतना है कि नियुक्ति अधिकतम तीन वर्ष तक की जा सकती है।

    कोर्ट ने कहा कि जब संबंधित व्यक्ति के नियुक्ति आदेश में अवधि एक वर्ष स्पष्ट रूप से निर्धारित थी, तो केवल विभागीय नियमावली के आधार पर उसे तीन वर्ष की नियुक्ति नहीं माना जा सकता।

    इस आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि नियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित व्यक्ति का अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता के रूप में मामलों में पेश होना बिना अधिकार के था।

    हालांकि, कोर्ट ने इस मुद्दे पर आगे विचार करने के बजाय राज्य सरकार को महो की संबंधित अदालत में अतिरिक्त लोक अभियोजक की नई नियुक्ति की प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर शुरू करने का निर्देश देना उचित समझा। याचिकाकर्ता को भी नई नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने की स्वतंत्रता दी गई।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति की अतिरिक्त शासकीय वकील के रूप में नियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद उसकी स्थिति पर निर्णय लेने के लिए प्रतिवादियों को स्वतंत्र रखा गया।

    इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।

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