ई-रिक्शा के लिए देशभर में नीति बनाए केंद्र, 60 दिन में सभी राज्यों को भेजे: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Amir Ahmad

11 Sept 2026 5:02 PM IST

  • ई-रिक्शा के लिए देशभर में नीति बनाए केंद्र, 60 दिन में सभी राज्यों को भेजे: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को देशभर में ई-रिक्शा के संचालन को नियंत्रित करने के लिए 60 दिन के भीतर एक समान नीति तैयार कर सभी राज्यों को भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा की संख्या और उनके मार्गों को विनियमित करने की व्यवस्था जरूरी है, ताकि शहरों की सड़कों पर बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को कम किया जा सके।

    जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि ई-रिक्शा के संचालन के लिए ऐसी नीति तैयार की जाए, जिसमें किसी शहर की सड़क पर इनकी संख्या का नियमन और रूट परमिट जारी करने की व्यवस्था शामिल हो। इसका उद्देश्य किसी इलाके में ई-रिक्शा की आवाजाही को व्यवस्थित करना और सड़कों पर यातायात का दबाव कम करना है। कोर्ट ने केंद्र को नीति तैयार कर 60 दिनों के भीतर सभी राज्य सरकारों, जिसमें मध्य प्रदेश भी शामिल है, को भेजने का निर्देश दिया।

    मध्य प्रदेश के संबंध में हाईकोर्ट ने राज्य परिवहन आयुक्त को भी निर्देश दिया कि केंद्र की नीति का अध्ययन करने के बाद राज्य की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यदि किसी बदलाव की जरूरत हो तो उसे किया जाए। इसके लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। इसके बाद राज्य में नीति को 120 दिनों के भीतर अधिसूचित करना होगा।

    यह जनहित याचिका ई-रिक्शा के संचालन को लेकर नियमों के अभाव का मुद्दा उठाते हुए दायर की गई। याचिका में कहा गया कि करीब 10 साल पहले ई-रिक्शा का इस्तेमाल शुरू हुआ, लेकिन इनके संचालन और आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नियम नहीं बनाए गए। इसके चलते सड़कों पर भारी यातायात दबाव और अव्यवस्था पैदा हो रही है।

    सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल प्रवीण कुमार न्यूस्कर और राज्य की ओर से वकील स्मृति शर्मा ने याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमति जताई। अदालत को बताया गया कि ई-रिक्शा के संचालन को लेकर स्पष्ट नियमों का अभाव अब केवल किसी एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की समस्या बन चुका है।

    अदालत ने ई-रिक्शा की सुरक्षा से जुड़े पहलू को भी गंभीरता से लिया।

    सरकारी वकील मानस मणि वर्मा ने कोर्ट को बताया कि ई-रिक्शा के कुछ मॉडल पर्याप्त रूप से स्थिर नहीं हैं और उनके पलटने से दुर्घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि नई नीति में ऐसे वाहनों के रखरखाव और डिजाइन से जुड़े मानकों को शामिल किया जाए, जिससे वाहन का गुरुत्व केंद्र बेहतर तरीके से संतुलित रहे और पलटने की घटनाओं को रोका जा सके।

    हाईकोर्ट ने केंद्र को नीति बनाते समय इस सुझाव को भी शामिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि ई-रिक्शा की संख्या और मार्गों के नियमन के साथ-साथ यात्रियों और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए।

    खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि 120 दिनों के भीतर नीति तैयार कर राज्यों तक नहीं पहुंचाई जाती या मध्य प्रदेश में इसे अधिसूचित नहीं किया जाता है तो वह अदालत का रुख कर सकता है। इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा किया।

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