'इंस्टाग्राम से संतुष्ट नहीं तो इस्तेमाल न करें': अकाउंट निलंबन मामले में एमपी हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
Amir Ahmad
18 Sept 2026 5:23 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कॉपीराइट उल्लंघन की शिकायतों के बाद इंस्टाग्राम पोस्ट हटाए जाने और अकाउंट निलंबित किए जाने को चुनौती देने वाली सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर की याचिका पर गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।
जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा है और यदि उपयोगकर्ता उसकी सेवाओं से संतुष्ट नहीं है तो वह प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न करने का विकल्प चुन सकता है।
याचिकाकर्ता '@memenasha' नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट चलाता है और उसके करीब 39 हजार फॉलोअर्स होने का दावा है। याचिका के मुताबिक वह 2019 से डिजिटल कंटेंट बना रहा है और विज्ञापन तथा सहयोगी अभियानों के जरिए सोशल मीडिया से अपनी आजीविका कमाता है। उसका कहना है कि इंस्टाग्राम अकाउंट उसकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों के नियम 3(1)(बी)(iv) को चुनौती दी गई।
उसका तर्क है कि यह प्रावधान सोशल मीडिया मध्यस्थों को कॉपीराइट, ट्रेडमार्क या अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों के कथित उल्लंघन के आधार पर उपयोगकर्ताओं की सामग्री हटाने की मनमानी शक्ति देता है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कॉपीराइट उल्लंघन से जुड़े विवादों में तथ्यात्मक सवाल शामिल होते हैं, जिनका फैसला ट्रायल कोर्ट या सक्षम न्यायिक प्राधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। किसी निजी सोशल मीडिया मंच को अपने स्तर पर यह तय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि कॉपीराइट का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
इस पर चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मेटा इंस्टाग्राम की मालिक है और यदि यूजर उसकी सेवाओं से संतुष्ट नहीं है तो वह उसका इस्तेमाल न करे।
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के जरिए कमाई कर रहा है और इसलिए उसके लिए इस अधिकार का व्यावसायिक मूल्य भी जुड़ जाता है।
अदालत ने यह भी कहा कि मंच का मालिक अपने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट हटाने का अधिकार रखता है और यूजर्स ने अपनी सामग्री को हमेशा बनाए रखने के लिए कोई 'लीज' नहीं ली है।
याचिका के अनुसार 4 जुलाई 2025 को इंस्टाग्राम ने याचिकाकर्ता को दो ईमेल भेजकर बताया कि 2 मई और 16 जून 2025 को अपलोड की गई उसकी पोस्ट तीसरे पक्ष की कॉपीराइट शिकायत के बाद हटा दी गई। उसे कथित तौर पर शिकायतकर्ताओं से सीधे संपर्क कर विवाद सुलझाने की सलाह दी गई।
इसके दो दिन बाद 6 जुलाई को 3 अप्रैल, 17 अप्रैल और 24 अप्रैल को अपलोड की गई तीन अन्य पोस्ट भी इसी आधार पर हटा दी गईं। याचिकाकर्ता का दावा है कि कुल पांच पोस्ट बिना पूर्व नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए हटा दी गईं।
इसके बाद 25 जुलाई 2025 को उसने इंस्टाग्राम के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। उसका आरोप था कि कॉपीराइट जांच की व्यवस्था का इस्तेमाल उसके अकाउंट के खिलाफ साइबर अटैक की तरह किया जा रहा है।
याचिका के मुताबिक शिकायतकर्ता से बातचीत के बाद उसे पता चला कि उसी व्यक्ति ने संबंधित कॉपीराइट शिकायतें दर्ज की थीं। उसने बातचीत के स्क्रीनशॉट इंस्टाग्राम को भेजते हुए शिकायत की जांच किसी व्यक्ति के स्तर पर कराने का अनुरोध किया।
याचिका के अनुसार 25 अगस्त 2025 को इंस्टाग्राम ने उसे बताया कि 16 अगस्त को अपलोड की गई एक और पोस्ट तीसरे पक्ष की कॉपीराइट शिकायत के बाद हटा दी गई। इसके बाद उसका इंस्टाग्राम अकाउंट निलंबित कर दिया गया। उसने उसी दिन सुबह करीब 8:50 बजे निलंबन के खिलाफ अपील की और कॉपीराइट व्यवस्था के कथित दुरुपयोग की शिकायत भी दोहराई।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बाद इंस्टाग्राम ने उसका अकाउंट निष्क्रिय कर दिया। उसने 31 अगस्त को अकाउंट बहाल करने का अनुरोध किया और 21 सितंबर, 23 दिसंबर 2025 तथा 22 जनवरी 2026 को याद दिलाने के बावजूद अकाउंट बहाल नहीं किया गया। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

