छतरपुर फायरिंग केस: बागेश्वर धाम प्रमुख के भाई शालिग्राम को हत्या के प्रयास मामले में हाईकोर्ट से जमानत
Amir Ahmad
17 Sept 2026 12:20 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर के चर्चित फायरिंग मामले में हत्या के प्रयास के आरोपी शालिग्राम को नियमित जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर गोली चलाने की जो विशिष्ट भूमिका बताई गई, उसे जांच के दौरान सामने आए पूरे साक्ष्य और सामग्री के संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है। इस स्तर पर कोर्ट को साक्ष्यों का सूक्ष्म परीक्षण या मामले की लघु सुनवाई करने की आवश्यकता नहीं है।
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने मामले की परिस्थितियों और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को देखते हुए जमानत मंजूर की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत देते समय उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की।
शालिग्राम बागेश्वर धाम प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री के भाई हैं। पुलिस ने करीब दो महीने पहले उन्हें एक अन्य आरोपी के साथ गिरफ्तार किया था। मामला छतरपुर जिले के राजनगर क्षेत्र में एक गौशाला के पीछे जमीन विवाद से जुड़ा बताया गया।
अभियोजन के अनुसार, शालिग्राम और अन्य आरोपियों ने पीड़ित मोतीलाल कुशवाहा को स्कूल के पास रास्ते में रोका। आरोप है कि शालिग्राम ने पीड़ित के साथ गाली-गलौज की और अन्य आरोपियों को लकड़ी के डंडों से उस पर हमला करने के लिए उकसाया। इसी दौरान पिस्तौल से पीड़ित पर गोली चलाए जाने का आरोप है।
शालिग्राम पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) के तहत हत्या के प्रयास, धारा 296(बी) के तहत अश्लील कृत्य और गाने तथा धारा 351(3) के तहत आपराधिक धमकी के आरोप लगाए गए। इसके अलावा उन पर शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और 27 के तहत भी मामला दर्ज है।
शालिग्राम की ओर से पेश वकील ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के कारण मामले में फंसाया गया। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी एक प्रसिद्ध संत के रिश्तेदार हैं और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से उन्हें मामले में आरोपी बनाया गया।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि घटना वाले दिन शिकायतकर्ता और कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर शालिग्राम और अन्य आरोपियों के साथ मारपीट की थी, जिसमें उन्हें चोटें आई थीं। इस संबंध में पुलिस से शिकायत भी की गई, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई। वकील के अनुसार, कुछ ग्रामीणों ने घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया, जिससे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री से पीड़ित की जान लेने के प्रयास से जुड़ा अपराध सामने आता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ मुख्य आरोप पीड़ित को गाली देने और अन्य आरोपियों को उस पर हमला करने के लिए उकसाने का है। पिस्तौल से गोली चलाने की विशिष्ट भूमिका को पूरे साक्ष्य और जांच के दौरान एकत्र सामग्री के संदर्भ में देखा जाना होगा।
कोर्ट ने कहा कि इस चरण में साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन करना या मामले की लघु सुनवाई करना उचित नहीं होगा। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने शालिग्राम को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक स्थानीय जमानतदार पेश करने की शर्त पर नियमित जमानत दी।


