बागेश्वर धाम दुष्कर्म मामले में DNA रिपोर्ट से नया मोड़, आरोपी का मिलान नहीं हुआ तो मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विशेष जांच के दिए निर्देश

  • बागेश्वर धाम दुष्कर्म मामले में DNA रिपोर्ट से नया मोड़, आरोपी का मिलान नहीं हुआ तो मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विशेष जांच के दिए निर्देश

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम से जुड़े नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी के DNA का भ्रूण के DNA से मिलान नहीं होने के बाद विशेष टीम गठित कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह पता लगाने को कहा है कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म किस व्यक्ति ने किया और उसके गर्भस्थ शिशु का जैविक पिता कौन है।

    जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए छतरपुर एसपी को विशेष टीम गठित कर दो महीने के भीतर विस्तृत जांच पूरी करने और उसके आधार पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

    मामले के अनुसार अभियोजन का आरोप था कि आरोपी ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें वह करीब दो महीने की गर्भवती पाई गई। बाद में उसका गर्भसमापन कराया गया और भ्रूण को सुरक्षित रखा गया। इसके बाद आरोपी के रक्त का नमूना लेकर रासायनिक और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।

    राज्य फोरेंसिक साइंस लैब ने 29 अगस्त 2026 को अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में सामने आया कि आरोपी भ्रूण का जैविक पिता नहीं था। इस DNA रिपोर्ट के बाद मामले में यह सवाल खड़ा हो गया कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म किसने किया और गर्भस्थ शिशु का जैविक पिता कौन है।

    कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि पीड़िता की जिरह के दौरान उसने कहा था कि वर्तमान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म नहीं किया। हालांकि कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पीड़िता की उम्र 16 वर्ष थी और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 180 और 183 के तहत दर्ज उसके बयानों में उसने आरोपी पर जबरन दुष्कर्म करने का आरोप लगाया।

    कोर्ट ने कहा कि वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार आरोपी भ्रूण का जैविक पिता नहीं है, जबकि पीड़िता के अनुसार उसके एक पुरुष के साथ शारीरिक संबंध के कारण वह गर्भवती हुई। ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति की पहचान करना आवश्यक है जिसने नाबालिग के साथ यौन अपराध किया और साथ ही भ्रूण के जैविक पिता की पहचान भी जांच का विषय है।

    इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज की और छतरपुर एसपी को विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने टीम को यह पता लगाने के लिए विस्तृत जांच करने को कहा कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म किसने किया और भ्रूण का जैविक पिता कौन है। जांच दो महीने के भीतर पूरी कर उचित और उपयुक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

    इस निर्देश के साथ हाईकोर्ट ने वर्तमान आरोपी की जमानत याचिका का निपटारा किया।

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