रेलवे के 4.47 लाख रुपये के गबन के आरोप में महिला अधिकारी को अग्रिम जमानत नहीं, हाईकोर्ट ने कहा- जांच में हिरासत में पूछताछ जरूरी हो सकती है

Amir Ahmad

21 Aug 2026 3:33 PM IST

  • रेलवे के 4.47 लाख रुपये के गबन के आरोप में महिला अधिकारी को अग्रिम जमानत नहीं, हाईकोर्ट ने कहा- जांच में हिरासत में पूछताछ जरूरी हो सकती है

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे की मुख्य बुकिंग पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत महिला कर्मचारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। महिला पर अन्य रेलवे कर्मचारियों के साथ मिलकर टिकट बिक्री से प्राप्त 4.47 लाख रुपये के रेलवे राजस्व के कथित गबन का आरोप है।

    जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी की सटीक भूमिका का पता लगाया जाना बाकी है। ऐसे में हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता।

    मामला रेलवे के एक बुकिंग कार्यालय में टिकट बिक्री से प्राप्त राशि में 4.47 लाख रुपये की कमी पाए जाने से जुड़ा है। इस मामले में सहायक मुख्य बुकिंग पर्यवेक्षक, मुख्य बुकिंग पर्यवेक्षक और स्टेशन प्रबंधक समेत अन्य कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए।

    महिला कर्मचारी की ओर से दलील दी गई कि उसे केवल संदेह और अनुमान के आधार पर मामले में फंसाया गया तथा उसके सीधे तौर पर कथित गबन में शामिल होने का कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है।

    बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि कथित राशि की कमी 4 और 5 दिसंबर 2024 की है, जबकि प्राथमिकी 15 जनवरी 2026 को दर्ज की गई। याचिकाकर्ता के अनुसार, FIR दर्ज करने में एक वर्ष से अधिक की देरी का कोई संतोषजनक कारण अभियोजन की ओर से नहीं बताया गया।

    महिला कर्मचारी ने यह भी दावा किया कि संबंधित तारीखों पर वह स्वीकृत अवकाश पर थी। वह न तो संबंधित बुकिंग काउंटर पर तैनात थी और न ही रेलवे की नकदी संभाल रही थी। उसने विभागीय जांच का भी हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर उस कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की गई, जो संबंधित काउंटर पर तैनात था और नकदी संभाल रहा था।

    बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता रेलवे की स्थायी कर्मचारी है उसका सेवा रिकॉर्ड साफ है और उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला पहले से दर्ज नहीं है।

    राज्य की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि मामला बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन के गबन से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार यह केवल उस कर्मचारी की भूमिका तक सीमित नहीं है, जो बुकिंग काउंटर पर नकदी संभाल रहा था बल्कि रेलवे कर्मचारियों के बीच पहले से बनाई गई साजिश का आरोप भी है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत पर विचार करते समय अदालत साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि इस स्तर पर केवल इस आधार पर आरोपी की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह कथित घटना के दिन अवकाश पर थी या उसने सीधे नकदी नहीं संभाली थी।

    अदालत ने कहा,

    “अभियोजन का मामला केवल बुकिंग काउंटर पर तैनात कर्मचारी द्वारा नकदी संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों के बीच पूर्व नियोजित साजिश का आरोप है। इसलिए संबंधित तारीख पर याचिकाकर्ता के स्वीकृत अवकाश पर होने या उसके द्वारा सीधे नकदी नहीं संभालने का तथ्य इस स्तर पर बड़ी साजिश में उसकी कथित भूमिका को निर्णायक रूप से खारिज नहीं कर सकता।”

    विभागीय जांच में किसी दूसरे कर्मचारी की जिम्मेदारी तय किए जाने की दलील पर भी हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार किया।

    अदालत ने कहा कि विभागीय जांच में दर्ज निष्कर्ष एक प्रासंगिक परिस्थिति हो सकता है, लेकिन उससे किसी दूसरे व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी स्वतः तय या समाप्त नहीं होती, खासकर जब उसके खिलाफ साजिश की जांच चल रही हो।

    पीठ ने FIR दर्ज करने में हुई देरी की दलील को भी स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि केवल FIR दर्ज करने में देरी होने से इस स्तर पर अभियोजन के मामले को झूठा या दुर्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता।

    हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को यह पता लगाना है कि टिकट बिक्री की राशि में कमी किस तरह हुई और प्रत्येक आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या थी। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच तथा मामले से जुड़े लोगों के बयानों के आधार पर आरोपियों से पूछताछ की आवश्यकता हो सकती है।

    जस्टिस अजय कुमार निरंकरी ने कहा कि आरोपित अपराध की गंभीरता, रेलवे की नकदी की राशि, पूर्व नियोजित साजिश का आरोप और जांच के दौरान याचिकाकर्ता की सटीक भूमिका का अभी पूरी तरह पता नहीं चलना अग्रिम जमानत के खिलाफ जाते हैं।

    इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए उसकी याचिका खारिज की।

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