गेस्ट लेक्चरर नियमित कर्मचारियों के समान अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश के हकदार नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
Amir Ahmad
4 Aug 2026 4:35 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर अस्थायी या आकस्मिक आधार पर नियुक्त किए जाते हैं और उनके सेवा नियम नियमित कर्मचारियों से अलग होते हैं।
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त द्वारा अतिथि व्याख्याताओं को 7 दिन का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश देने की मांग वाली याचिका खारिज करने का आदेश बरकरार रखा।
कोर्ट ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर अस्थायी/आकस्मिक आधार पर नियुक्त होते हैं और उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं का समान अधिकार नहीं दिया जा सकता।
खंडपीठ ने कहा,
"गेस्ट लेक्चरर अस्थायी या आकस्मिक आधार पर नियुक्त किए जाते हैं और उनके लिए अलग सेवा शर्तें निर्धारित हैं। इसलिए वे नियमित सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों का दावा नहीं कर सकते।"
मामला गेस्ट लेक्चरर द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 7 दिन के अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश की उनकी मांग खारिज कर दी गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 5 जुलाई 2023 को जारी परिपत्र के तहत महिला कर्मचारियों को पहले से मिलने वाले 13 दिन के आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त 7 दिन का अवकाश देने का प्रावधान किया गया। इसी आधार पर उन्होंने अपने लिए भी यह लाभ मांगा था।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में विभाग के समक्ष आवेदन दिया, लेकिन निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर विभागीय आयुक्त ने मामले पर विचार किया और 22 अक्टूबर 2024 को उनकी मांग खारिज की।
आयुक्त ने अपने आदेश में कहा था कि गेस्ट लेक्चरर नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और वे अतिथि शिक्षकों के लिए निर्धारित अलग नियमों के तहत आते हैं। उन्हें 13 दिन का आकस्मिक अवकाश और 3 वैकल्पिक अवकाश का लाभ पहले से दिया जा रहा है, लेकिन अतिरिक्त 7 दिन का अवकाश नहीं दिया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि विभाग का निर्णय समानता के अधिकार के खिलाफ है और 5 जुलाई 2023 के परिपत्र के विपरीत है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आयुक्त ने लागू नियमों और नीतियों के अनुसार उचित कारणों के साथ आदेश पारित किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि आयुक्त का आदेश उचित है और उन्होंने याचिकाकर्ताओं के दावे पर विचार करने के बाद निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई कानूनी या वैधानिक अधिकार साबित नहीं कर पाए, जिसके आधार पर वे अतिरिक्त अवकाश की मांग कर सकें।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि रिट ऑफ मैंडमस केवल पहले से मौजूद कानूनी अधिकार को लागू करने के लिए जारी की जा सकती है, लेकिन इससे कोई नया अधिकार बनाया नहीं जा सकता।
कोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी लाभ का प्रावधान गेस्ट लेक्चरर के लिए नहीं है, तो उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान लाभ देने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
इन टिप्पणियों के साथ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।


