माता-पिता की आपत्ति के बावजूद वयस्क महिला जैन साध्वी बनने के लिए स्वतंत्र: एमपी हाईकोर्ट

Amir Ahmad

9 Sept 2026 6:23 PM IST

  • माता-पिता की आपत्ति के बावजूद वयस्क महिला जैन साध्वी बनने के लिए स्वतंत्र: एमपी हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 20 वर्षीय महिला को राहत देते हुए कहा कि वयस्क होने के नाते वह अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है।

    कोर्ट ने कहा कि भारत की नागरिक और 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिला को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धर्म का पालन करने का अधिकार है और उसके इस फैसले में किसी को भी जबरन हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने यह आदेश उस याचिका पर दिया, जिसमें महिला ने अपने माता-पिता और रिश्तेदारों की कथित दबावपूर्ण कार्रवाई से सुरक्षा मांगी थी। महिला ने कहा था कि वह सांसारिक जीवन त्यागकर जैन साध्वी बनना चाहती है और श्वेतांबर जैन धर्म के अनुसार दीक्षा लेना चाहती है।

    याचिकाकर्ता का आरोप था कि उसके माता-पिता और रिश्तेदार उसके फैसले का विरोध कर रहे हैं और उसे धार्मिक मार्ग अपनाने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उसे आशंका थी कि परिवार के सामाजिक प्रभाव के चलते उसकी अंतरात्मा और धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित की जा सकती है और उसकी आवाजाही पर भी रोक लगाई जा सकती है। उसने इस संबंध में इंदौर पुलिस कमिश्नर को भी सुरक्षा के लिए आवेदन दिया।

    कोर्ट ने माता-पिता की स्थिति के प्रति सहानुभूति जताई, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता वयस्क है और उसके व्यक्तिगत तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

    कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा उसकी स्वतंत्रता में बाधा डालना कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं है।

    पीठ ने महिला को निर्देश दिया कि यदि उसके खिलाफ उसके माता-पिता समेत कोई व्यक्ति किसी तरह की जबरदस्ती करता है तो वह पुलिस अधीक्षक या संबंधित थाने के प्रभारी को आवेदन देकर सहायता मांग सकती है।

    कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा आवेदन दिया जाता है तो संबंधित अधिकारी या थाना प्रभारी मामले को देखे और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तत्काल उचित कार्रवाई करे।

    इस तरह हाईकोर्ट ने वयस्क महिला के अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार जीवन का रास्ता चुनने के अधिकार को मान्यता देते हुए उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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