महाकाल मंदिर के पास से शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने का रास्ता साफ, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण को दी मंजूरी
Amir Ahmad
10 Sept 2026 3:26 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ी करने के नगर निगम के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम ने संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए और मस्जिद का प्रबंधन करने वाले लोगों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर देने के बाद कार्रवाई की।
जस्टिस संदीप एन. भट्ट की पीठ ने कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-ए का उल्लंघन नहीं करती। कोर्ट ने 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ, करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित आवाजाही, यातायात व्यवस्था और मस्जिद की स्थिति को भी ध्यान में रखा।
कोर्ट ने कहा कि शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के लगभग सामने और क्षिप्रा नदी के बेहद करीब स्थित है। सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और यातायात प्रबंधन के लिए सड़क चौड़ीकरण जरूरी है। पीठ ने कहा कि बड़े जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम की कार्रवाई कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद की गई।
मामले में याचिकाएं उन दो पक्षों ने दाखिल की थीं, जो मस्जिद का प्रबंधन करने का दावा करते हैं। मस्जिद वक्फ संपत्ति के तौर पर रजिस्टर्ड है। याचिकाकर्ताओं ने सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने के लिए मस्जिद के एक हिस्से को हटाने संबंधी नगर निगम के नोटिस को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि प्रस्तावित कार्रवाई से मस्जिद के नमाज स्थल यानी जमातखाना, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही का हिस्सा प्रभावित होगा। उन्होंने दलील दी कि यह सदियों पुरानी धार्मिक संरचना है और नमाज स्थल, वजू की सुविधा तथा मीनार धार्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक आस्था और प्रथाओं की सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण भले ही जनहित में हो, लेकिन इससे समुदाय के सदियों पुराने पूजा स्थल पर धर्म का पालन करने के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम ने मध्य प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 की धाराओं 322 और 323 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। यह धाराएं सार्वजनिक सड़कों, अवरोधों और अनधिकृत खुदाई या फुटपाथ तोड़ने जैसे मामलों से संबंधित हैं। यह दलील भी दी गई कि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड को उचित तरीके से नोटिस नहीं दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि सड़क चौड़ीकरण के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध है, जिससे मस्जिद को नुकसान पहुंचाए बिना परियोजना पूरी की जा सकती है।
नगर निगम की ओर से कहा गया कि सड़क चौड़ीकरण उज्जैन विकास योजना-2035 के तहत किया जा रहा है। शाही सवारी, पेशवाई और 2028 के सिंहस्थ के दौरान यातायात सुचारु रखने और जाम से बचने के लिए यह चौड़ीकरण जरूरी है।
नगर निगम ने भेदभाव के आरोप से भी इनकार किया। उसने कोर्ट को बताया कि उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 90 धार्मिक संरचनाओं को हटाने या स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जा रही है। इनमें 10 मंदिर और एक मस्जिद पहले ही हटाए जा चुके हैं।
नगर निगम ने कहा कि शाही मस्जिद के कुल ढांचे के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से को हटाने की जरूरत है और प्रभावित हिस्से को लेकर आपत्तियों पर विचार किया गया।
पीठ ने कहा कि नगर निगम ने करीब 80 धार्मिक स्थलों के खिलाफ कार्रवाई की है। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि निगम मनमाने तरीके से या संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हुए कार्रवाई कर रहा है।
कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच के बाद पाया कि मस्जिद के प्रबंधन को सुनवाई का अवसर दिया गया और उन्हें सुनने के बाद ही संबंधित आदेश पारित किया गया। पीठ ने कहा कि उपलब्ध विकल्पों में से किसी संपत्ति, विशेष रूप से ऐतिहासिक या धार्मिक संपत्ति को बचाने की कोशिश की गई हो, तो केवल कार्रवाई के आधार पर इसे अनुचित या पक्षपातपूर्ण नहीं कहा जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले के तथ्यों और तस्वीरों को देखते हुए नगर निगम की कार्रवाई को अनुच्छेद 14, 25, 26 या 300-ए का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही पीठ ने दोनों याचिकाएं खारिज कीं।


