छात्रावास शुल्क विवाद में परीक्षा से रोकने के खिलाफ लॉ स्टूडेंट पहुंची मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस
Amir Ahmad
13 July 2026 7:23 PM IST

छात्रावास शुल्क को लेकर विवाद के कारण एलएलबी की स्टूडेंट को द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने से रोकने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया।
अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।
जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने कहा,
"प्रतिवादियों को सात कार्य दिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी किया जाए। नोटिस चार सप्ताह में प्रत्यावर्तनीय हो। इसके बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाए।"
याचिकाकर्ता तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम की स्टूडेंट है। उसका कहना है कि कॉलेज छात्रावास शुल्क से जुड़े विवाद को उसकी शैक्षणिक परीक्षा से नहीं जोड़ सकता, जबकि वह शिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क पहले ही जमा कर चुकी है।
याचिका के अनुसार, स्टूडेंट ने वर्ष 2022-23 के शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के समय 48,000 रुपये का वार्षिक शिक्षण शुल्क जमा किया था। वह 16 नवंबर 2022 से कॉलेज से संबद्ध हॉस्टल में रह रही है और छात्रावास शुल्क के रूप में कुल 80,000 रुपये का भुगतान कर चुकी है।
स्टूडेंट का दावा है कि पहले 30,000 रुपये जमा करने के बाद उसने बकाया राशि चुकाने के लिए 50,000 रुपये नकद भी दिए, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने बार-बार अनुरोध के बावजूद उसकी कोई रसीद जारी नहीं की।
याचिका में कहा गया कि लेखा विभाग ने नकद भुगतान को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जबकि 20 जून 2023 को कॉलेज ने उसे 'कोई बकाया नहीं' प्रमाणपत्र जारी किया, जिसे स्टूडेंट ने उस तारीख तक किए गए सभी भुगतानों की पुष्टि माना।
याचिका के अनुसार, स्टूडेंट को प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में बिना किसी आपत्ति के बैठने दिया गया। बाद में 7 नवंबर 2023 को उसने हॉस्टल प्रशासन को पत्र देकर दिसंबर 2023 के अंत तक शेष राशि जमा करने का आश्वासन भी दिया।
स्टूडेंट का कहना है कि हॉस्टल प्रशासन ने 1,22,400 रुपये बकाया होने का दावा किया, जबकि कॉलेज के अध्यक्ष ने विवादित 50,000 रुपये के नकद भुगतान के मुद्दे का समाधान करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद उसे यह कभी नहीं बताया गया कि निर्धारित समय तक बकाया जमा न करने पर उसे परीक्षा से वंचित कर दिया जाएगा।
याचिका में आरोप लगाया गया कि लेखा विभाग ने नकद भुगतान को स्वीकार करने से इनकार कर स्टूडेंट को परेशान किया। साथ ही, परीक्षा आवेदन पत्र और प्रवेश पत्र रोकने का निर्णय लेने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का कोई अवसर भी नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
इन आधारों पर स्टूडेंट ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि कॉलेज और देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया जाए कि उसे एलएलबी प्रथम वर्ष के द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए।


