विदेशी अदालत का आदेश अंतिम नहीं, बच्चों का हित सर्वोपरि: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अमेरिका का कस्टडी आदेश मानने से किया इनकार

Amir Ahmad

21 April 2026 7:28 PM IST

  • विदेशी अदालत का आदेश अंतिम नहीं, बच्चों का हित सर्वोपरि: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अमेरिका का कस्टडी आदेश मानने से किया इनकार

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि बच्चों की भलाई किसी भी विदेशी अदालत के आदेश से ऊपर है। कोर्ट ने अमेरिका के टेक्सास की अदालत द्वारा दिए गए कस्टडी आदेश को भारत में लागू करने से इनकार किया।

    जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत का आदेश एक प्रासंगिक पहलू हो सकता है लेकिन यह अंतिम और बाध्यकारी नहीं है खासकर जब मामला बच्चों के हित से जुड़ा हो।

    कोर्ट ने कहा,

    “कोर्टों के पारस्परिक सम्मान का सिद्धांत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह बच्चों के सर्वोपरि हित को नजरअंदाज नहीं कर सकता। यदि विदेशी आदेश बच्चों के हित के विपरीत है तो उसे यांत्रिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता।”

    मामले में पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपने बच्चों की कस्टडी मांगी थी, यह कहते हुए कि टेक्सास की अदालत ने 14 अप्रैल, 2025 के आदेश में उन्हें बच्चों का एकमात्र संरक्षक घोषित किया और उनके निवास का निर्णय लेने का अधिकार दिया।

    हाईकोर्ट ने माना कि भारत में विदेशी कस्टडी आदेश स्वतः लागू नहीं होते, विशेषकर जब बच्चों की भलाई का सवाल हो। सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा गया कि कॉमिटी ऑफ कोर्ट्स महत्वपूर्ण जरूर है लेकिन बच्चों के हित से ऊपर नहीं हो सकता।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बच्चों से बातचीत भी की। पाया गया कि वे भारत में अच्छी तरह से रह रहे हैं, अपनी मां के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं और उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं है।

    रिकॉर्ड के अनुसार दंपति 2017 से अमेरिका में रह रहे हैं। अगस्त 2024 में मां बच्चों के साथ भारत आईं लेकिन वापस नहीं गईं। इसके बाद पिता ने यह याचिका दायर की थी।

    इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाइकोर्ट ने विदेशी आदेश को लागू करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज की। हालांकि कोर्ट ने बच्चों की स्थायी कस्टडी के मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया।

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