इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, सरकार के जवाब पर जताई नाराजगी, कार्रवाई का मांगा शपथपत्र

Amir Ahmad

24 July 2026 4:07 PM IST

  • इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, सरकार के जवाब पर जताई नाराजगी, कार्रवाई का मांगा शपथपत्र

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष जताते हुए सरकार को निर्देश दिया कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई का शपथपत्र पेश किया जाए।

    साथ ही यह भी बताया जाए कि मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 की धारा 18 का पालन सुनिश्चित कराने के लिए इंदौर जिला कलेक्टर ने क्या कदम उठाए हैं।

    जस्टिस सुभोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि सरकार की ओर से यह जरूर बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अदालत दिए गए जवाबों से संतुष्ट नहीं है।

    पीठ ने कहा,

    "ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है और आगे इसे रोकने के लिए और क्या किया जा सकता है, इसका विस्तृत जवाब शपथपत्र के साथ प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 की धारा 18 के पालन के लिए जिला कलेक्टर ने क्या कदम उठाए।"

    हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की।

    यह मामला सोशल एक्टिविस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।

    याचिका में कहा गया है कि इंदौर में अनियंत्रित ध्वनि प्रदूषण संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार और शांतिपूर्ण नींद के अधिकार का उल्लंघन है।

    याचिकाकर्ता के अनुसार अत्यधिक शोर का सबसे अधिक असर बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ता है।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि शहर में लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल सुबह छह बजे से लेकर देर रात तक, कई बार आधी रात के बाद भी किया जाता है, जबकि कानून में इसके लिए समय-सीमा तय है। इसके बावजूद प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है।

    याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि जिला कलेक्टर द्वारा लाउडस्पीकरों के उपयोग को नियंत्रित करने संबंधी आदेश जारी किए गए और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 भी लागू हैं, लेकिन इनका प्रभावी पालन नहीं कराया जा रहा है।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि अधिक ध्वनि क्षमता वाले साउंड सिस्टम खुलेआम बेचे और किराये पर दिए जा रहे हैं। ऐसे उपकरणों की बिक्री और आपूर्ति पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से शहर में ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।

    इसके अलावा, शादी-ब्याह की बारातों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सड़कों पर जाम लगने और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल से आम लोगों को भारी परेशानी होने की बात भी याचिका में कही गई।

    याचिकाकर्ता का कहना है कि मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में लाउडस्पीकरों के उपयोग को नियंत्रित करने, निर्धारित समय के बाद इनके संचालन पर रोक लगाने और नियमों के उल्लंघन पर उपकरण जब्त करने का प्रावधान है, लेकिन इन कानूनी प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया जा रहा है।

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