शादी का झांसा देकर मुवक्किल से दुष्कर्म का आरोप: वकील को अग्रिम जमानत से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का इनकार

Amir Ahmad

24 Aug 2026 3:51 PM IST

  • शादी का झांसा देकर मुवक्किल से दुष्कर्म का आरोप: वकील को अग्रिम जमानत से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का इनकार

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर अपनी मुवक्किल से दुष्कर्म करने के आरोपी वकील को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने जांच के दौरान सामने आए होटल के अभिलेख, पीड़िता के माता-पिता और दोस्तों के बयान तथा FIR समेत अन्य सामग्री को देखते हुए राहत देने से इनकार किया।

    अभियोजन के अनुसार पीड़िता कानूनी सलाह लेने के लिए आरोपी वकील के संपर्क में आई थी। आरोप है कि वकील ने खुद को अविवाहित बताते हुए उससे शादी का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में पीड़िता ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया लेकिन आरोपी के लगातार आग्रह के बाद वह इसके लिए तैयार हो गई।

    इसके बाद आरोपी ने पीड़िता को मिलने के लिए बुलाया और उसे एक होटल ले गया जहां उसके नाम से कमरा बुक किया गया। आरोप है कि वहां आरोपी ने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर जोर दिया और शादी का भरोसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के अनुसार इसके बाद भी अलग-अलग मौकों पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने।

    जब पीड़िता ने आरोपी से शादी करने के लिए कहा तो कथित तौर पर उसने अपनी मां की खराब तबीयत का हवाला दिया और कहा कि उनकी सेहत ठीक होने के बाद वह उससे शादी कर लेगा।

    बाद में पीड़िता को पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसका एक साल का बच्चा भी है। इसके बाद उसने उज्जैन जिले के खराकुआं थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।

    आरोपी की ओर से सत्र अदालत में भी राहत की मांग की गई लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया।

    हाईकोर्ट में आरोपी के वकील ने दलील दी कि पीड़िता की ओर से की गई शिकायत में आरोपी के साथ कथित संबंधों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। वहीं पीड़िता की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि संबंध के विफल होने को आरोपी के कथित कृत्यों को सही ठहराने का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह भी कहा गया कि शिकायत में दोनों के बीच संबंधों का स्पष्ट उल्लेख है।

    पीड़िता की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि आरोपी ने उसके साथ मारपीट की, मोबाइल फोन से दोनों की तस्वीरें मिटाने का प्रयास किया और उसे धमकाया।

    हाईकोर्ट ने जांच के दौरान एकत्र सामग्री पर गौर किया। कोर्ट ने विशेष रूप से देवास के एक होटल के प्रबंधक के 27 जून 2026 के बयान का उल्लेख किया जिसमें बताया गया कि आरोपी 7 सितंबर 2025, 19 अक्टूबर 2025, 2 नवंबर 2025 और 25 दिसंबर 2025 को पीड़िता के साथ होटल आया था।

    पीठ ने पीड़िता के माता-पिता और दोस्तों के बयानों पर भी गौर किया। इन लोगों ने आरोपी और पीड़िता के बीच शादी के प्रस्ताव की जानकारी होने की बात कही थी। कोर्ट ने उज्जैन के खराकुआं थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 90/2026 की FIR और 7 जून 2026 को उज्जैन के अनुविभागीय दंडाधिकारी के समक्ष आरोपी की ओर से दर्ज कार्यवाही को भी रिकॉर्ड में लिया।

    इन तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री को देखते हुए आरोपी अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है।

    कोर्ट ने याचिका खारिज की।

    पीठ ने निकिता जगन्नाथ शेट्टी बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में दिए गए 2025 के फैसले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत देते समय अदालत को बेहद सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि ऐसी राहत से न्याय में गंभीर चूक हो सकती है और जांच भी काफी प्रभावित हो सकती है।

    इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी वकील को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए उसकी याचिका खारिज की।

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