इंदौर में रोड डिवाइडर और फुटपाथों पर अवैध होर्डिंग के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

  • इंदौर में रोड डिवाइडर और फुटपाथों पर अवैध होर्डिंग के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में रोड डिवाइडर और फुटपाथों पर कथित अवैध होर्डिंग और यूनिपोल लगाए जाने के मामले में राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। जनहित याचिका में इंदौर नगर निगम के खिलाफ कार्रवाई करने और शहर में लगाए गए कथित अवैध विज्ञापन ढांचों को हटाने की मांग की गई।

    चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने 23 अक्टूबर को निर्देश दिया कि सात कार्यदिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा किए जाने पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। नोटिस का जवाब तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करना होगा।

    यह जनहित याचिका दो प्रैक्टिसिंग वकीलों ने दायर की। याचिका में इंदौर नगर निगम को शहर के विभिन्न इलाकों में सड़क के डिवाइडर और पैदल चलने वालों के फुटपाथों पर लगाए गए कथित अवैध यूनिपोल और होर्डिंग हटाने का निर्देश देने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये ढांचे मध्य प्रदेश आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम, 2017 का उल्लंघन करते हैं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।

    याचिका के मुताबिक, शहर में लगभग 58 यूनिपोल सड़क के डिवाइडर या मीडियन पर लगाए गए हैं, जबकि करीब 45 अन्य यूनिपोल पैदल चलने वालों के फुटपाथों और रास्तों पर स्थापित किए गए।

    याचिकाकर्ताओं ने अवैध होर्डिंग से होने वाले खतरे को रेखांकित करते हुए 24 सितंबर 2026 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर का भी हवाला दिया। खबर के अनुसार, पाटनीपुरा चौराहे पर कथित अवैध होर्डिंग का एक पैनल गिर गया, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों पर असर पड़ा तथा एक व्यक्ति घायल हो गया।

    याचिका में यूनिपोल और होर्डिंग हटाने के साथ-साथ विज्ञापनों से होने वाली आय के संग्रह की स्वतंत्र जांच या ऑडिट कराने की मांग की गई। इसके अलावा अंतरिम राहत के तौर पर अधिकारियों को सड़क के डिवाइडर फुटपाथ, यातायात चौराहों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर नए यूनिपोल लगाने की अनुमति देने से रोकने का अनुरोध किया गया।

    याचिकाकर्ताओं ने इसी तरह के मुद्दे पर पहले दायर एक अन्य याचिका का भी उल्लेख किया। उस मामले में हाईकोर्ट ने अंतरिम निर्देश देते हुए इंदौर नगर निगम को कार्रवाई करने के लिए कहा था। बाद में नगर निगम की ओर से बताया गया कि वर्ष 2017 के नियमों के अनुसार विज्ञापन ढांचों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई। इसमें नगर निगम के 22 जोनल अधिकारी, 22 अतिरिक्त राजस्व निरीक्षक और मार्केट विभाग के कर्मचारी शामिल थे। इसके बाद अदालत ने उस याचिका का निपटारा किया।

    मौजूदा मामले में हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इंदौर शहर में सड़क के डिवाइडर और पैदल यात्रियों के फुटपाथों पर यूनिपोल लगाने के दौरान नियमों के उल्लंघन की जांच की जाए।

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