एसिड हमले की शिकार 4 वर्षीय बच्ची के इलाज का हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, निजी अस्पताल में मुफ्त उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश

Amir Ahmad

30 Jun 2026 5:46 PM IST

  • एसिड हमले की शिकार 4 वर्षीय बच्ची के इलाज का हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, निजी अस्पताल में मुफ्त उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एसिड हमले में गंभीर रूप से झुलसी चार वर्षीय बच्ची को तत्काल इंदौर के निजी बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इलाज का खर्च बच्ची के परिवार से नहीं लिया जाएगा और इसका भुगतान आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य 'निरामयम' योजना के तहत किया जाएगा।

    जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने 24 जून को अंतरिम आदेश पारित करते हुए बच्ची की गंभीर स्थिति और सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सीमित उपचार सुविधाओं को देखते हुए यह निर्देश जारी किया।

    अदालत ने कहा,

    "याचिकाकर्ता आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य 'निरामयम' योजना में पंजीकृत हैं और विशेषज्ञ निजी अस्पताल में उपचार कराना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में वे निजी अस्पताल में उपचार पाने के हकदार हैं।"

    याचिका के अनुसार, 29 मई 2026 को हुए एसिड हमले में चार वर्षीय बच्ची, उसका छह वर्षीय भाई और उनकी मां गंभीर रूप से झुलस गए। शुरुआत में उनका इलाज बड़वानी जिले के राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ, लेकिन पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें वहां से छुट्टी दे दी गई।

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के लक्ष्मी बनाम भारत संघ और परिवर्तन केंद्र बनाम भारत संघ मामलों में दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि एसिड हमले के पीड़ितों को सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में निशुल्क एवं समुचित उपचार उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है।

    इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह जांच करने का निर्देश दिया कि क्या पीड़ितों को इंदौर के किसी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बेहतर इलाज मिल सकता था। इसके बाद गठित मेडिकल समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पीड़ितों को लंबे समय तक विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सरकारी अस्पताल के बर्न वार्ड की खराब स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। अदालत के समक्ष प्रस्तुत तस्वीरों में वार्ड में गंदगी, दीवारों पर फफूंद और चूहों की मौजूदगी का दावा किया गया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि चार वर्षीय बच्ची और उसके छह वर्षीय भाई को गंभीर जलन की चोटें आई हैं और उचित इलाज नहीं मिलने पर सेप्सिस तथा सेप्टिक शॉक जैसी जानलेवा जटिलताएं हो सकती हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए अदालत ने दोहराया कि एसिड हमले के पीड़ितों को मुफ्त उपचार देना सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों की जिम्मेदारी है तथा विशेषज्ञ सुविधा नहीं होने का हवाला देकर इलाज से इनकार नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने बॉम्बे अस्पताल, इंदौर को निर्देश दिया कि वह बच्ची को तत्काल भर्ती करे।

    साथ ही कहा,

    "अस्पताल इलाज पर होने वाले खर्च का अलग लेखा-जोखा रखेगा और याचिकाकर्ता से किसी प्रकार की राशि की मांग नहीं करेगा। उपचार का खर्च आयुष्मान कार्ड के माध्यम से प्रतिपूर्ति किया जाएगा।"

    इसके अलावा, हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बड़वानी के सचिव को पीड़ित परिवार को मुआवजा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

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