अपराध का मामला दर्ज होना हथियार लाइसेंस निलंबित करने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

Amir Ahmad

14 Aug 2026 3:49 PM IST

  • अपराध का मामला दर्ज होना हथियार लाइसेंस निलंबित करने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आशंका के आधार पर किसी व्यक्ति का हथियार लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता कि लाइसेंसी हथियार का संभावित रूप से दुरुपयोग कर सकता है। अदालत ने कहा कि लाइसेंस निलंबित करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को हथियार अधिनियम, 1959 की धारा 17 के तहत स्वतंत्र और ठोस कारणों के आधार पर संतुष्ट होना आवश्यक है।

    जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने या उसके लंबित होने के आधार पर लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। प्राधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा कि लाइसेंस जारी रहने से सार्वजनिक शांति या सुरक्षा पर किस तरह प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    अदालत ने कहा,

    “सक्षम प्राधिकारी को हथियार अधिनियम, 1959 की धारा 17 की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वतंत्र और कारणयुक्त संतुष्टि दर्ज करनी होगी। वह केवल आपराधिक मामले के दर्ज होने या लंबित होने अथवा लाइसेंसी हथियार के संभावित दुरुपयोग की सामान्य आशंका के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकता।”

    मामला दतिया के कलेक्टर के 13 अप्रैल 2026 के आदेश से जुड़ा था। इस आदेश के जरिए याचिकाकर्ता का हथियार लाइसेंस उसके खिलाफ दर्ज कुछ आपराधिक मामलों के आधार पर निलंबित अथवा रद्द कर दिया गया।

    याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कलेक्टर ने उचित विचार किए बिना आदेश पारित किया। साथ ही हथियार अधिनियम की धारा 17(3) के तहत आवश्यक संतुष्टि भी दर्ज नहीं की गई। वकील ने कहा कि प्राधिकारी ने केवल आपराधिक मामले दर्ज होने और हथियार के संभावित दुरुपयोग की आशंका को आधार बनाया, जबकि यह नहीं बताया कि लाइसेंस जारी रहने से सार्वजनिक शांति या सुरक्षा को किस तरह खतरा पैदा होगा।

    हाईकोर्ट ने पाया कि विवादित आदेश हथियार अधिनियम की धारा 17 की आवश्यकताओं के विपरीत है। यह धारा हथियार लाइसेंस में बदलाव, उसके निलंबन और रद्द करने की प्रक्रिया से संबंधित है। अदालत ने यह भी कहा कि लाइसेंस निलंबित करने के लिए प्राधिकारी को लिखित आदेश पारित करना जरूरी है।

    पीठ ने यह भी पाया कि आदेश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया। अदालत के अनुसार, यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

    पीठ ने 7 जुलाई 2026 को पदम चंदा मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि केवल वही गतिविधियां हथियार अधिनियम की धारा 17(3)(बी) के दायरे में आएंगी, जिनसे सार्वजनिक शांति भंग होने या सार्वजनिक सुरक्षा खतरे में पड़ने की वास्तविक आशंका हो।

    मौजूदा मामले में हाईकोर्ट ने पाया कि लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने सार्वजनिक शांति और सुरक्षा से संबंधित कोई ठोस निष्कर्ष दर्ज नहीं किया था। इसलिए मामले को नए सिरे से विचार के लिए दतिया के कलेक्टर के पास वापस भेज दिया गया।

    अदालत ने निर्देश दिया कि नए सिरे से विचार करते समय याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित और प्रभावी अवसर दिया जाए। साथ ही, आपराधिक मामलों की स्थिति और प्रकृति, उनका निपटारा हुआ है या नहीं, हथियार लाइसेंस मिलने के बाद याचिकाकर्ता का आचरण तथा सार्वजनिक शांति या सुरक्षा से संबंधित किसी अन्य प्रासंगिक सामग्री पर भी विचार किया जाए।

    हालांकि, इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।

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