इंस्टाग्राम एन्क्रिप्शन विवाद: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड जाने को कहा

Amir Ahmad

11 April 2026 4:20 PM IST

  • इंस्टाग्राम एन्क्रिप्शन विवाद: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड जाने को कहा

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंस्टाग्राम पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन खत्म करने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को पहले डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया के पास जाने का निर्देश दिया।

    जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता सात दिनों के भीतर बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखे। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि बोर्ड याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देते हुए 15 दिनों के भीतर तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित करे।

    यह जनहित याचिका वकील पार्थ शर्मा द्वारा दायर की गई, जिसमें इंस्टाग्राम के उस निर्णय को चुनौती दी गई, जिसके तहत 8 मई 2026 से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सुविधा समाप्त करने की बात कही गई।

    याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह फैसला भारतीय नागरिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। याचिका में कहा गया कि एन्क्रिप्शन हटने से निजी मैसेज असुरक्षित हो जाएंगे और इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने दलील दी कि यह मामला जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता। साथ ही उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले वैधानिक संस्था डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड का रुख नहीं किया।

    अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि पहले वैधानिक उपाय अपनाना आवश्यक है। इसके तहत याचिकाकर्ता को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत गठित बोर्ड के पास जाना होगा।

    हाइकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता बोर्ड के समक्ष आवेदन देता है तो बोर्ड 6 मई से पहले कानून के अनुसार निर्णय ले। साथ ही अगली सुनवाई में याचिकाकर्ता को बोर्ड के फैसले से अदालत को अवगत कराना होगा।

    गौरतलब है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है, जिससे केवल मैसेज भेजने और प्राप्त करने वाले ही उसे पढ़ सकते हैं, यहां तक कि प्लेटफॉर्म प्रदाता भी नहीं।

    इस मामले में याचिका में मेटा से अपने फैसले को वापस लेने और निजी मैसेज में एन्क्रिप्शन बनाए रखने की मांग की गई।

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