स्पोर्ट्स से सेल्फ डिफेंस कैटेगरी में हथियार लाइसेंस बदलने का प्रावधान प्रथम दृष्टया नहीं: एमपी हाईकोर्ट
Amir Ahmad
8 Oct 2026 3:26 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट और उससे जुड़े नियमों में प्रथम दृष्टया हथियार लाइसेंस की श्रेणी को स्पोर्ट्स से सेल्फ डिफेंस में बदलने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि आर्म्स एक्ट की धारा 17 लाइसेंस की शर्तों में बदलाव की अनुमति देती है, लेकिन यह प्रावधान लाइसेंस की प्रकृति या श्रेणी को ही बदलने का अधिकार नहीं देता।
जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी ने मामले की सुनवाई करते हुए भोपाल के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह स्पोर्ट्स श्रेणी के हथियार लाइसेंस को सेल्फ डिफेंस श्रेणी में बदलने की वैधता की जांच करें और 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार कारणयुक्त एवं स्पष्ट आदेश पारित करें।
मामला याचिकाकर्ता के हथियार लाइसेंस से जुड़ा है। उसने भोपाल कलेक्टर के 2 अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जरिए उसका हथियार लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
याचिका में कहा गया कि इससे पहले 18 मार्च 2026 को जिला मजिस्ट्रेट ने उसके स्पोर्ट्स श्रेणी के लाइसेंस को सेल्फ डिफेंस श्रेणी में बदलने की अनुमति दी थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि उसे आर्म्स रूल्स, 2016 की अनुसूची-3 में निर्धारित फॉर्म III के तहत स्पोर्ट्स श्रेणी का हथियार लाइसेंस मिला था। बाद में संबंधित प्राधिकरण ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि हथियार चलाने के बाद उसने खाली कारतूस रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष क्यों प्रस्तुत नहीं किए।
याचिकाकर्ता ने नोटिस का जवाब देते हुए यह भी बताया कि वह स्पोर्ट्स गतिविधियों के अलावा राजनीति में भी सक्रिय है और पार्षद के रूप में काम कर रहा है। इसके बाद तीन सदस्यीय समिति ने जांच रिपोर्ट दी और लाइसेंस की श्रेणी को स्पोर्ट्स से सेल्फ डिफेंस में बदलने की सिफारिश की। इस रिपोर्ट के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट ने 18 मार्च 2026 को लाइसेंस की श्रेणी बदलने की अनुमति दी।
हालांकि, बाद में उसी तीन सदस्यीय समिति ने एक और रिपोर्ट पेश की, जिसमें लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई।
रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को निष्क्रिय शूटर बताते हुए कहा गया कि उसने राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लिया था। इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट ने 2 अप्रैल 2026 को उसका लाइसेंस रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि 2 अप्रैल का आदेश 18 मार्च के पहले आदेश की अनदेखी करते हुए पारित किया गया।
राज्य की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता निष्क्रिय खिलाड़ी था और वह हथियार या कारतूस का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, इसलिए लाइसेंस रद्द करना उचित है।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि पहले तीन सदस्यीय समिति ने लाइसेंस की श्रेणी को सेल्फ डिफेंस में बदलने की सिफारिश की थी और उसके आधार पर 18 मार्च को जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश पारित किया था। इसके बाद उसी समिति ने पहले की रिपोर्ट का उल्लेख किए बिना दूसरी रिपोर्ट पेश की, जिसके आधार पर 2 अप्रैल का आदेश पारित हुआ।
कोर्ट ने कहा कि 2 अप्रैल का आदेश 18 मार्च के पहले आदेश की “पूरी तरह अनदेखी” करते हुए पारित किया गया।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पहले के आदेश को न तो किसी उच्च प्राधिकारी ने निरस्त किया था और न ही उसे पारित करने वाले प्राधिकारी ने वापस लिया था। ऐसे में 2 अप्रैल का लाइसेंस रद्द करने वाला आदेश टिकाऊ नहीं है।
हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने 18 मार्च के आदेश के जरिए लाइसेंस की श्रेणी बदलने की वैधता पर अंतिम मुहर लगाने से इनकार किया।
कोर्ट ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट को पहले यह जांचना होगा कि लागू कानूनी प्रावधानों के तहत स्पोर्ट्स श्रेणी के लाइसेंस को सेल्फ डिफेंस श्रेणी में बदलना वास्तव में अनुमेय है या नहीं।
कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आर्म्स एक्ट या नियमों में लाइसेंस की प्रकृति बदलने का कोई प्रावधान दिखाई नहीं देता। धारा 17 लाइसेंस की शर्तों में बदलाव की अनुमति देती है, लेकिन इसमें यह नहीं कहा गया है कि लाइसेंस की प्रकृति या श्रेणी को ही बदला जा सकता है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए भोपाल के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह लाइसेंस की श्रेणी में किए गए बदलाव की वैधता पर 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार कारणयुक्त आदेश पारित करें।
याचिकाकर्ता को इस उद्देश्य से 26 अक्टूबर 2026 को जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया।

