उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी प्रतिनिधि नियुक्ति विवाद में हाईकोर्ट ने सिंगल जज के आदेश पर लगाई रोक
Amir Ahmad
2 Nov 2026 12:05 PM IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में पुजारी प्रतिनिधि नियुक्त करने के सिंगल जज के आदेश पर रोक लगाई। मंदिर के पुजारी परिवार के दिवंगत धर्मराज शर्मा के बेटों की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने यह अंतरिम आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई तक सिंगल जज के आदेश पर रोक जारी रहेगी।
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डिवीजन बेंच ने कहा कि अपीलकर्ताओं के वकील के मुताबिक, आदेश का पालन 30 दिनों के भीतर किया जाना था, जबकि अपीलकर्ताओं को मूल याचिका में आवश्यक पक्षकार होने के बावजूद शामिल नहीं किया गया था। विवाद की प्रकृति को देखते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक आदेश के प्रभाव पर रोक लगाना उचित माना।
विवाद की शुरुआत मंगल शर्मा की ओर से दायर रिट याचिका से हुई थी। उन्होंने अपीलीय अदालत के उस आदेश का पालन कराने की मांग की थी, जिसके तहत उन्हें धर्मराज शर्मा के भाई कमल शर्मा का प्रतिनिधि नियुक्त किया जाना था।
सिंगल जज ने मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर के इस आश्वासन के बाद याचिका का निपटारा किया था कि 16 जनवरी 2023 को मंगल शर्मा को पुजारी प्रतिनिधि नियुक्त करने संबंधी सिफारिश लागू की जाएगी।
इसके बाद मौजूदा अपीलकर्ताओं ने 14 अक्टूबर 2026 के सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी। अपील में कहा गया कि वे मूल रिट याचिका में आवश्यक पक्षकार थे, लेकिन उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया। अपीलकर्ताओं के मुताबिक, आदेश का 30 दिनों में पालन होने से उनके अधिकार प्रभावित हो सकते थे।
अपील में यह भी कहा गया कि 16 जनवरी 2023 की सिफारिश मंदिर प्रबंध समिति के केवल दो सदस्यों ने की थी, जबकि मध्य प्रदेश श्री महाकालेश्वर मंदिर अधिनियम, 1982 की धारा 9 के तहत समिति की बैठक के लिए तीन सदस्यों का कोरम आवश्यक है।
अपीलकर्ताओं ने मंगल शर्मा को कमल शर्मा द्वारा कथित रूप से गोद लिए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि 30 जनवरी 2008 को बनाया गया गोदनामा हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम के तहत अमान्य है, क्योंकि कथित गोद लिए जाने के समय मंगल शर्मा की उम्र लगभग 28-29 वर्ष थी। अपील में यह भी बताया गया कि कथित गोद लेने को मान्यता देने वाले फैसले और डिक्री को उज्जैन की सिविल कोर्ट में लंबित एक अन्य मुकदमे में चुनौती दी गई।
सुनवाई के दौरान मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि समिति भी विवादित आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की प्रक्रिया में है। मंगल शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अंतरिम राहत देने की मांग का कड़ा विरोध किया।
विवाद को देखते हुए डिवीजन बेंच ने अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले को अब 9 दिसंबर 2026 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

