कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाली पोस्ट हटाने के IT नियमों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ठहराया वैध, इंस्टाग्राम अकाउंट निलंबित करने को चुनौती खारिज

  • कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाली पोस्ट हटाने के IT नियमों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ठहराया वैध, इंस्टाग्राम अकाउंट निलंबित करने को चुनौती खारिज

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप में इंस्टाग्राम पोस्ट हटाए जाने और उसके बाद अकाउंट निलंबित किए जाने को चुनौती देने वाले एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर की याचिका खारिज की। हाईकोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(बी)(iv) की संवैधानिक वैधता भी बरकरार रखी। यह नियम सोशल मीडिया मंचों को कॉपीराइट और अन्य मालिकाना अधिकारों का उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने की अनुमति देता है।

    चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोग्जे और जस्टिस विवेक रूसिया की खंडपीठ ने कहा कि मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक निजी कंपनी हो सकती है, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 2(डब्ल्यू) के तहत वह मध्यवर्ती मंच की परिभाषा में आती है। ऐसे मंच पर उचित सावधानी बरतने की जिम्मेदारी है और इसके तहत उसे अपने मंच से हानिकारक या अधिकारों का उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने का अधिकार दिया गया।

    अदालत ने कहा कि यदि मेटा द्वारा संचालित इंस्टाग्राम पर प्रकाशित किसी पोस्ट से पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट या किसी अन्य मालिकाना अधिकार का उल्लंघन होता है, तो कंपनी को उस पोस्ट या सामग्री को हटाने का अधिकार है।

    याचिकाकर्ता इंस्टाग्राम पर '@memenasha' नाम से अकाउंट चलाता था। उसका तर्क था कि किसी निजी सोशल मीडिया मंच को न्यायिक निर्णय के बिना यह तय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि कॉपीराइट का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

    याचिकाकर्ता के वकील ने संबंधित नियम को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि उसके अकाउंट को निलंबित या निष्क्रिय करने से उसके मौलिक अधिकारों, विशेष रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। यह भी दलील दी गई कि इंस्टाग्राम ने सामग्री हटाने और अकाउंट निलंबित करने से पहले याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।

    इन दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 2(डब्ल्यू) के तहत इंस्टाग्राम मध्यवर्ती प्लेटफॉर्म है। वर्ष 2021 के नियम इसी अधिनियम की धारा 87 के तहत बनाए गए और सोशल मीडिया मध्यवर्ती मंचों के लिए उचित सावधानी बरतने संबंधी दायित्व निर्धारित करते हैं।

    खंडपीठ ने यह भी ध्यान दिया कि नियमों में शिकायतों के निपटारे के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था की गई है। पहले स्तर पर प्रकाशक या मंच के शिकायत अधिकारी के माध्यम से शिकायत का निवारण किया जाता है। दूसरे स्तर पर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता वाली स्व-नियामक संस्था के समक्ष मामला उठाया जा सकता है। तीसरे स्तर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की व्यवस्था शामिल है, जिसमें अंतर-विभागीय समिति भी आती है।

    अदालत ने कहा कि नियम 3(1)(बी) के तहत मध्यवर्ती मंचों को यूजर्स को अपने नियमों, विनियमों, निजता नीति और यूजर समझौते की जानकारी अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा में देनी होती है। साथ ही, उनसे उचित प्रयास करने की अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसी जानकारी को प्रदर्शित, अपलोड, संशोधित, प्रकाशित, प्रसारित, संग्रहित, अद्यतन या साझा न करें जो किसी अन्य व्यक्ति की हो।

    खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि नियम 3(1)(सी) के तहत प्लेटफॉर्म को नियमों का पालन नहीं करने वाले यूजर की कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच या उसके इस्तेमाल के अधिकार को तत्काल समाप्त करने अथवा नियमों के विपरीत सामग्री हटाने या दोनों कदम उठाने का अधिकार दिया गया।

    नियम 3(2) के तहत शिकायत निवारण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि शिकायत अधिकारी को शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर उसकी प्राप्ति स्वीकार करनी होती है और 15 दिनों के भीतर उसका निपटारा करना होता है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता और यूजर, दोनों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। वे पहले शिकायत अधिकारी और उसके बाद अपीलीय समिति के समक्ष अपनी शिकायत रख सकते हैं। इसलिए संबंधित प्रावधान को अधिकारातीत या असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता।

    अदालत ने कहा कि जब कानून और उसके तहत बनाए गए नियम किसी कंपनी को मध्यवर्ती मंच के रूप में ऑनलाइन मंच संचालित करने की अनुमति देते हैं, तो उसे उस मंच के प्रबंधन और नियंत्रण का अधिकार देना भी उचित है। इन परिस्थितियों में नियम 3(1)(बी)(iv) की संवैधानिक वैधता में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

    पिछली सुनवाई के दौरान, जब हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था तब मौखिक रूप से टिप्पणी की गई कि इंस्टाग्राम का मालिक मेटा है और वह ऐसा कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति उसकी सेवाओं से संतुष्ट नहीं है, तो वह उनका इस्तेमाल न करने का विकल्प चुन सकता है।


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