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साइबर क्राइम क्या है भाग 1: जानिए अधिनियम का परिचय

Shadab Salim
22 Nov 2021 4:22 AM GMT
साइबर क्राइम क्या है भाग 1: जानिए अधिनियम का परिचय
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मनुष्यता के इतिहास के साथ अपराध भी जुड़े रहे हैं।एक सभ्य समाज के साथ-साथ अपराध भी निरंतर बने रहे है। समय और परिस्थितियों के अनुसार अपराधों में भी परिवर्तन होता रहा है। आज वर्तमान समय में साइबर अपराध जैसा शब्द सामने आता है। विश्व के लगभग सभी देशों ने साइबर अपराध से निपटने हेतु कानून बनाए हैं। इस आलेख के अंतर्गत उन जानकारियों को प्रस्तुत किया जा रहा है जो साइबर अपराध को स्पष्ट करती है।

प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास के बाद कंप्यूटर से संबंधित अपराधों का जन्म हुआ है जिसे आमतौर पर "साइबर अपराध" कहा जाता है।

इन अपराधों की व्यापक वृद्धि वैश्विक चिंता का विषय बन गई, तथा अपराध एक नई चुनौती के रूप में विश्व भर के सामने आए हैं। यह अपराध अजीब है अपराधी शारीरिक रूप से उपस्थित हुए बिना गुमनाम रूप से और पीड़ित से बहुत दूर रहकर अपराध कर देता है। यह साइबर अपराधी पकड़े जाने के भय के बिना दूर से ही किसी अपराध को कारित कर देते हैं।

इन अपराधों में संचार सेवाओं की चोरी, औद्योगिक जासूसी, साइबर-स्पेस में अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार, इलेक्ट्रॉनिक मनी लॉन्ड्रिंग और कर चोरी, इलेक्ट्रॉनिक क्रूरता, आतंकवाद और जबरन वसूली जैसी अवैध कंप्यूटर से संबंधित गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। इस ही के साथ इसमे टेली-मार्केटिंग धोखाधड़ी, टेली-संचार का अवैध अवरोधन भी शामिल है।

साइबर अपराध

साइबर अपराध' शब्द संसद द्वारा अधिनियमित किसी भी क़ानून या अधिनियम में कहीं भी परिभाषित नहीं है। एक मायने में, यह पारंपरिक अपराध की अवधारणा से मौलिक रूप से अलग नहीं है क्योंकि दोनों में आचरण शामिल है चाहे वह कार्य हो या लोप, जो कानून के उल्लंघन का कारण बनता है और इसलिए यह राज्य द्वारा दंडनीय है।

साइबर अपराध को किसी भी अवैध आपराधिक गतिविधि के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो कंप्यूटर का उपयोग या तो एक उपकरण, लक्ष्य या आगे अपराध करने के साधन के रूप में करता है।

साइबर अपराध एक गैरकानूनी कार्य है जिसमें कंप्यूटर या तो एक उपकरण या लक्ष्य है या दोनों साइबर अपराध में आपराधिक गतिविधियों की एक विस्तृत विविधता शामिल है।

कंप्यूटर डेटा या सिस्टम, कंप्यूटर की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता संबंधित अपराध, सामग्री संबंधी अपराध, कॉपीराइट संबंधी अपराध सभी इसमे शामिल है।

साइबर अपराध और पारंपरिक अपराध के बीच अधिक अंतर नहीं है। पारंपरिक अपराध शारीरिक रूप से उपस्थित होकर किए जाते हैं और उन्हीं अपराधों को दूर बैठकर कंप्यूटर के माध्यम से जब किया जाता है तब वह साइबर अपराध बन जाते हैं। जैसे कि किसी व्यक्ति के साथ ठगी की जाती है कोई कूटरचित दस्तावेज को प्रस्तुत कर पीड़ित को ठग लिया जाता है तब यह ठगी का अपराध बन जाता है।

अब यदि ऐसी ठगी कंप्यूटर पर चलने वाली टेली मार्केटिंग के माध्यम से की जा रही है तब वह ठगी साइबर अपराध की श्रेणी में आ जाती है इसलिए यह कहा जा सकता है कि साइबर अपराध अपराध का कोई नया स्वरूप नहीं है अपितु यह तो वही अपराध है जो दशकों से होते आ रहे हैं बस इन अपराधों ने चेहरा बदल लिया है, अपराध का प्लेटफार्म बदल लिया है।

साइबर अपराध प्रकृति में अंतरराष्ट्रीय है और इसका दायरा दुनिया के विभिन्न हिस्सों पर अलग-अलग प्रभाव डालता है। विभिन्न देशों के राष्ट्रीय निहित स्वार्थ साइबर अपराध के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दृष्टिकोणों में संघर्ष, एक रणनीति विकसित करने के संयुक्त प्रयासों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मानकीकृत सार्वभौमिक एंटी-साइबर अपराध कानून के पारित होने में एक प्रमुख मार्ग है।

साइबर अपराध के खिलाफ लड़ने के लिए चुनौती से निपटने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाने के बावजूद वांछित सफलता नहीं मिली है क्योंकि इन अपराधियों को पकड़ना अत्यंत कठिनाई भरा कार्य है।

साइबर स्पेस और इंटरनेट गतिविधियों की विस्तृत श्रृंखला को चलाने के पसंदीदा माध्यम के रूप में विकसित होने के साथ-साथ दुनिया भर में साइबर अपराध का एक आसान और सुविधाजनक तरीका बन गया है, जिसे केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से ही पता लगाया जा सकता है।

विभिन्न देशों के दोहरे अपराध का सिद्धांत साइबर अपराध के अपराधियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है। इसलिए, दुनिया भर में विशेष रूप से साइबर अपराध के लिए कानूनों की एकरूपता साइबर अपराधों और अपराधियों के खिलाफ लड़ने की सबसे बड़ी जरूरत है।

क्यों होते हैं सायबर अपराध:-

सायबर अपराध अनेक प्रकार के हैं। इस आलेख के अंतर्गत साइबर अपराध पर परिचय प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके भाग 2 में साइबर अपराध के प्रकारों का उल्लेख किया जाएगा। परंतु साइबर अपराधों के प्रकारों को जानने के पूर्व इन अपराधों के होने के कारणों को जानना आवश्यक है।

विद्वानों की राय और परिस्थितियों के अवलोकन से साइबर अपराध के निम्न कारण प्रतीत होते हैं-

1)- कंप्यूटर में बहुत कम जगह में डेटा स्टोर करने की अनूठी विशेषता है। यह भौतिक या आभासी माध्यम से अधिक आसानी से जानकारी प्राप्त करने और निकालने की सुविधा देता है इसलिए से संबंधित अपराध करना भी आसान होता है।

2)- कंप्यूटर तक पहुंच आसान है और इसलिए, जटिल साइबर स्पेस प्रौद्योगिकी के उपयोग से अनधिकृत पहुंच सुरक्षा प्रणाली को दरकिनार करना आसानी से संभव है।

3)- कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं जो जटिल होते हैं और लाखों कोड से बने होते हैं। साइबर अपराधी इसका सदोष लाभ उठाते हैं

4)- कंप्यूटर प्रणाली की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि साक्ष्य कुछ ही समय में नष्ट हो जाते हैं। अपराधियों के लिए अपराध होने के तुरंत बाद सबूतों को नष्ट करना आसान हो जाता है जिससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधी पर मुकदमा चलाने के लिए प्रासंगिक सामग्री साक्ष्य एकत्र करना मुश्किल हो जाता है।

5)- कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कंप्यूटर उपयोगकर्ता की ओर से थोड़ी सी भी लापरवाही के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं क्योंकि साइबर अपराधी अपने आपराधिक लक्ष्य को पूरा करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम पर अवैध पहुंच और अनधिकृत नियंत्रण प्राप्त कर सकता है।

वायरस क्या है:-

वायरस सबसे आम समस्याएं हैं जो कंप्यूटर सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं। वायरस एक प्रोग्राम या कोड है जो किसी अन्य प्रोग्राम, सेक्टर या दस्तावेज़ को स्वयं को सम्मिलित करके या स्वयं को उस माध्यम से जोड़कर दोहराता है और संक्रमित करता है। वायरस का प्रभाव यह है कि यह डेटा फ़ाइलों और अन्य कार्यक्रमों को नष्ट कर देता है या बदल देता है। दुर्लभ मामलों को छोड़कर, वायरस कंप्यूटर हार्डवेयर को नुकसान नहीं पहुंचाता है। दुनिया भर में वायरस के 5000 से अधिक विभिन्न प्रकार हैं।

आमतौर पर वायरस के दो मुख्य वर्ग होते हैं। फाइल इंफेक्टर्स, जो खुद को साधारण प्रोग्राम फाइलों से जोड़ते हैं।

डायरेक्ट- एक्शन वायरस हर बार उस प्रोग्राम को निष्पादित करने के लिए संक्रमित करने के लिए एक या अधिक प्रोग्राम का चयन करता है जिसमें यह शामिल होता है। रेज़िडेंट वायरस स्मृति में कहीं छुप जाता है। पहली बार किसी संक्रमित प्रोग्राम को निष्पादित किया जाता है, और उसके बाद अन्य प्रोग्रामों को निष्पादित होने पर संक्रमित करता है।

वायरस की दूसरी श्रेणी बूट-रिकॉर्ड इंफेक्टर है। ये वायरस संक्रमित करते हैं। डिस्क पर कुछ सिस्टम क्षेत्रों में निष्पादन योग्य कोड पाया जाता है, जो सामान्य नहीं है।

वायरस हॉक्स:-

एक वायरस हॉक्स आम तौर पर एक ई-मेल संदेश प्रकट होता है जो एक विशेष वायरस का वर्णन करता है जो वास्तव में मौजूद नहीं है। ऐसे संदेशों का उद्देश्य कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं में दहशत पैदा करना है। लेखक या लेखक चेतावनी को ई-मेल करते हैं और पाठक के लिए इसे दूसरों को अग्रेषित करने के लिए एक अनुरोध शामिल करते हैं।

संदेश तब एक श्रृंखला पत्र की तरह फैलता है। जैसे ही लोग इसे प्राप्त करते हैं, पूरे इंटरनेट पर प्रचार-प्रसार करते हैं और फिर इसे फॉरवर्ड करते हैं। यह सलाह हमेशा दी जाती है कि इस तरह के फर्जी वायरस पर कार्रवाई करने के बजाय इसे अनदेखा करें या हटा दें।

वायरस के अलावा, कुछ सामान्य साइबर अपराध हैं जो कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क या डेटा के खिलाफ निर्देशित होते हैं जबकि अन्य ऐसे भी होते हैं जिनमें कंप्यूटर का उपयोग अपराध करने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जाता है।

इसलिए, इस दृष्टिकोण से विचार करने पर, साइबर अपराधों को मोटे तौर पर दो प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:-

1)- साइबर अपराध जहां कंप्यूटर स्वयं अपराध का लक्ष्य है; तथा

2)- साइबर अपराध जहां कंप्यूटर अपराध का एक उपकरण है।

अपराध के लक्ष्य के रूप में कंप्यूटर

साइबर अपराध की इस श्रेणी में कंप्यूटर ही अपराध का निशाना बनता है। इन अपराधों में आम तौर पर शामिल हैं:

(1) कंप्यूटर सिस्टम या कंप्यूटर नेटवर्क की तोड़फोड़;

(2) ऑपरेटिंग सिस्टम और कार्यक्रमों की तोड़फोड़;

(3) डेटा/सूचना की चोरी;

(4) बौद्धिक संपदा की चोरी, जैसे कंप्यूटर सॉफ्टवेयर;

(5) विपणन जानकारी की चोरी; तथा

(6) कम्प्यूटरीकृत फाइलों जैसे व्यक्तिगत इतिहास, यौन मामले, वित्तीय डेटा, चिकित्सा जानकारी आदि से प्राप्त जानकारी के आधार पर ब्लैकमेल करना।

अपराध को सुविधाजनक बनाने वाले एक उपकरण के रूप में कंप्यूटर अपराध की इस श्रेणी में, कंप्यूटर का उपयोग करने के लिए एक उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है

आतंकवादी और अपराधी दुनिया भर में एन्क्रिप्टेड संदेशों को ई-मेल करने जैसे इंटरनेट तरीकों का उपयोग कर रहे हैं।

इन अपराधों में अपराध को सुगम बनाने के लिए कंप्यूटर प्रोग्रामों में हेराफेरी की जाती है। उदाहरण के लिए, ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) कार्ड और खातों का कपटपूर्ण उपयोग, ई-बैंकिंग या ई-कॉमर्स से संबंधित धोखाधड़ी, इलेक्ट्रॉनिक डेटा-इंटरचेंज आदि कंप्यूटर का उपयोग करके किए जाते हैं। साइबर पोर्नोग्राफी, सॉफ्टवेयर पायरेसी, ऑनलाइन जुआ, कॉपीराइट उल्लंघन, ट्रेडमार्क उल्लंघन ऐसे अपराधों के कुछ अन्य उदाहरण हैं।

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