Transfer Of Property में होने वाली लीज के बीच पारिवारिक समझौते के आधार पर संपत्ति का ट्रांसफर
Shadab Salim
24 Feb 2025 4:29 AM

यदि एक व्यक्ति से अपनी सम्पत्ति पट्टे पर किसी व्यक्ति को अन्तरित करता है तथा अन्तरण के उपरान्त उसकी मृत्यु हो जाती है एवं मृत्यु के समय उसके पाँच भाई एवं पाँच बहनें वारिस के रूप में विद्यमान थे जिन्होंने सम्पत्ति में हित प्राप्त किया। पर्याप्त विचार-विमर्श के उपरान्त सम्पति एक व्यक्ति को दे दी गयी। बहनों ने अपना-अपना अंश भी भाइयों के पक्ष में छोड़ दिया था।
पाँच भाइयों में से एक तत्समय विदेश में था तथा उसने इस पारिवारिक समझौते पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं किया। 'स' इस प्रकार प्राप्त सम्पूर्ण सम्पति 'ब' को बेच दिया तथा 'ब' ने '' पट्टेदारों को बेदखल करने के लिए वाद संस्थित किया। पटेदारों ने 'ब' की अधिकारिता को चुनोती दी। इस वाद का हल Transfer Of Property Act की धारा 109 में है जहां किसी लीज़ के चलते Lessor प्रॉपर्टी को ट्रांसफर कर दे।
इस वाद में यह तय हुआ कि बहनों ने अपने अधिकारों का परित्याग कर सम्पत्ति का मौखिक दान भाइयों के पक्ष में कर दिया था तथा भाइयों ने आपस में पारिवारिक समझौता कर सम्पत्ति अन्तरक को दे दिया था। कोर्ट ने यह भी अभिव्यक्त किया कि यह आवश्यक नहीं है कि समझौते के समय सभी भाई विद्यमान हों। विदेश में रहने वाला भाई अपने भाइयों को प्राधिकृत कर सकता है कि वे विवाद को सुलझा लें और उन्होंने आपस में विवाद सुलझाते हुए सम्पत्ति विक्रय को संदत कर दिया तथा उसने सम्पत्ति वादी को बेच दिया।
इस स्थिति में क्रेता को सम्पत्ति में वैध हित प्राप्त होगा। विक्रेता का सम्पत्ति के विद्यमान अधिकार, हित एवं स्वत्व तथा विक्रेता के भाइयों के भी अधिकार, हित एवं स्वत्व विधि के प्रवर्तन से समाप्त हो गए। चूँकि प्रत्यर्थी, Lessee को हैसियत से सम्पत्ति में विद्यमान है अतः वह वादी के हित के अध्यधीन है, चूँकि वाद Lessee को बेदखली हेतु संस्थित था, अतः बेदखली हेतु पारित डिक्री विधि सम्मत थी।
Lessee का भाटक किराया का भुगतान करने का दायित्व - धारा 109 का परन्तुक उपबन्धित करता है कि अन्तरिती अन्तरण से पहले के भाटक किराया के शोध्य बकार्यों का हकदार नहीं है और यदि Lessee यह विश्वास करने का कारण न रखते हुए कि ऐसा अन्तरण किया गया है, Lessor को भाटक/ किराया दे देता है तो Lessee अन्तरिती की ऐसा भाटक/ किराया पुनः देने का दायी नहीं होगा।
अतः अन्तरण से पूर्व के भाटकों/किरायों जो शोध्य हो चुके हैं के लिए अन्तरिती अधिकारी नहीं होगा। इसी प्रकार वह ऐसी त्रुटि का लाभ उठाने का अधिकारी नहीं होगा। भले ही अन्तरिती के पक्ष में हुए अन्तरण के फलस्वरूप अन्तरितों में स्वत्व का निहित होना अन्तरण विलेख के निष्पादन एवं पंजीकरण के फलस्वरूप पूर्ण हो चुका हो, फिर भी Lessee अन्तरिती को किराया का भुगतान तब तक करने के लिए बाध्य नहीं है जब तक कि उसे अन्तरण की सूचना न मिल जाए। पर यदि अन्तरण की सूचना मिलने के बाद Lessee Lessor ने किराया का भुगतान करता है तो ऐसा भुगतान वैध भुगतान नहीं माना जाएगा।
इसी प्रकार यदि अन्तरिती के पक्ष में अन्तरण के पश्चात् Lessee अपनी पट्टाधृति पट्टे की अवधि समाप्त होने के फलस्वरूप Lessor को समर्पित करता हैं तो ऐसा समर्पण वैध नहीं होगा और न ही अन्तरिती पर आबद्धकारी और वह अन्तरिती पट्टे की अवधि के समापन पर अतिधारण के लिए Lessee से किराया की माँग कर सकेगा।
यदि Lessee को अन्तरण को सूचना मिल जाती है तो यह सूचना से आबद्ध होगा तथा यह महत्वपूर्ण नहीं होगा कि सूचना उसे अन्तरक से अथवा अन्तरिती से प्राप्त हुई है। यदि उसे अन्तरण की प्रत्यक्ष या परोक्ष सूचना को फिर भी उसने किराया का भुगतान अन्तरक को किया तो वह अन्तरिती के प्रति अपने दायित्व से बच नहीं सकेगा। यदि किराया अभी शोध्य नहीं हुआ है फिर भी उसका भुगतान कर दिया जाता है तो किराया अदा करने के दायित्व का अनुपालन हुआ नहीं समझा जाएगा।
यदि Lessee के निष्कासन हेतु संस्थित वाद के लम्बन के दौरान, वादी भूस्वामी वाद को विषयवस्तु की एक रजिस्ट्रीकृत विक्रय विलेख द्वारा एक अन्य व्यक्ति के पक्ष में अन्तरित कर देता है, तो ऐसे अन्तरितों को अन्तरक के सभी अधिकार प्राप्त होंगे; परन्तु धारा 109 में उपबन्धित परन्तुक के आलोक में, अन्तरिती स्वयमेव अन्तरण की तिथि से पूर्व शोध्य बकाया को पाने के लिए प्राधिकृत नहीं होगा।
अगर क्रेता, क्रय की गयी सम्पत्ति का केवल क्रय की गयी तिथि से ही सम्पत्ति का स्वामी बनेगा। यदि Lessee से कोई किराया शोध्य है सम्पति क्रय किए जाने की तिथि से पूर्व की अवधि के लिए तो यह तब तक की अवधि के लिए व कार्य की रकम के लिए प्राधिकृत नहीं होगा जब तक कि यह उसे अन्तरित न कर दे।
भूस्वामी के हित का क्रेता, किरायेदार से शोध्य किराया की बकाया धनराशि पाने का अधिकारी नहीं है जब तक कि उक्त धनराशि भी न अन्तरित कर दी गयी हो। भूमि के साथ चलने वाली प्रसंविदाएँ जो अन्तरण के समय अन्तरक से अन्तरितों को अन्तरित होती हैं उनमें अन्तरण के पश्चात् शोध्य होने वाले किराया भी सम्मिलित होंगे तथा अन्तरिती सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 8 एवं 109 में उल्लिखित प्रावधानों के आलोक में पाने के लिए प्राधिकृत है तथा Lessor एवं Lessee का सम्बन्ध अन्तरण के पश्चात् अन्तरिती एवं Lessee जो सांविधिक अभिधार के माध्यम से मूल Lessor का Lessee था के बीच स्थापित हो जाता है।
संविदात्मक अभिधार को आवश्यकता नहीं होती है। यदि मूल Lessor एवं अन्तरक, अन्तरण की सूचना Lessee को देता है तो Lessee किराया का भुगतान अन्तरिती को करेगा पर यदि अन्तरण की सूचना Lessee को नहीं दी गयी है तो मूल Lessor द्वारा पर Lessee को इस तथ्य का ज्ञान हो जाता है चाहे अन्तरिती द्वारा दी गयी सूचना के आधार पर या अन्यथा तो भी Lessee अन्तरिती को ही किराये का भुगतान करने के लिए आबद्ध होगा। यद्यपि, यदि वह चाहे तो अन्तरिती से अन्तरण का प्रमाण मांग सकेगा।
यदि Lessor किराये के बकाये के भुगतान हेतु वाद संस्थित करता है Lessee के विरुद्ध जिसे पट्टे के अनुसरण में सम्पत्ति कब्जा पा गया था तो ऐसी स्थिति में यह अभिकधित करने एवं साबित करने का भार Lessee पर होता है पट्टे की निरन्तरता के दौरान तथा उस कालावधि, जिसके लिए पट्टे की माँग की गयी है, उसने (Lessee ने) लीज़ सम्पत्ति Lessor थी। यदि यह तथ्य साबित नहीं हो पाता है तो Lessee किराया का भुगतान करने के दायित्वाधीन होगा किराया का भुगतान Lessee अथवा उसकी एवज में कोई भी अन्य व्यक्ति कर सकेगा। एक अन्तरण विलेख द्वारा सम्पत्ति में के अधिकार स्वत्व एवं हित एक सहस्रनामों के पक्ष में अन्तरित कर दिया गया, पर रेन्ट का समनुदेशन कहीं भी नहीं किया गया।
अतः धारा 109 के परन्तुक के आलोक में अन्तरित समनुदेशन से पूर्व रेन्ट पाने के लिए प्राधिकृत नहीं है। किराया की रकम मात्र एक ऋण के तुल्य है। समनुदेशन से पूर्व शोध्य किराया, किराया का बकाया नहीं माना जाएगा। यह मात्र एक अनुयोग्य दावा है ।।
श्री हमिंग दैलोवा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एवं अन्य के वाद में एक सम्पत्ति 'अ' के पक्ष में पट्टे के रूप में अन्तरित की गयी। अ ने उक्त सम्पत्ति को पुन: पट्टे द्वारा 'ब' के पक्ष में अन्तरित किया। अ ने कालान्तर में उक्त सम्पत्ति को 'स' के पक्ष में बेच दिया। इस संव्यवहार के फलस्वरूप 'स' ने 'अ' का स्थान ग्रहण कर लिया किन्तु यह स्वयं 'ब' के पक्ष में सृजित पट्टे का प्रतिसंहरण नहीं करा सकेगा विशेष कर तब जबकि पट्टे की शर्तों के अन्तर्गत लीज़ को समाप्त कराने का अधिकार 'ब' को दे दिया गया हो।
अतः जब तक कि 'ब' पट्टे का प्रतिसंहरण नहीं कराता है, 'स' सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत नहीं होगा। 'ब' से एक मुश्त किराया प्राप्त करने के कारण, 'ब' के पक्ष में 'अ' द्वारा सृजित लीज़ शाश्वत लीज़ में परिवर्तित हो गया था। इन परिस्थितियों में सम्पत्ति क्रय करने के बावजूद भी 'स''अ' को संदत किराए का बँटवारा नहीं करा सकेगा अथवा 'ब' से किराया हेतु प्रतिकर की माँग नहीं कर सकेगा।
परन्तुक का पैरा 3 – यदि यह पाया जाता है कि पट्टाकर्ता, उसका अन्तरिती एवं पट्टेदार, अन्तरिती को देय किराया के विषय में सहमत हो गये हैं तो Lessor अथवा अन्तरिती, बिना दूसरे को पक्षकार बनाये देय किराया के सम्बन्ध में वाद संस्थित कर सकेगा पट्टाकर्ता, अन्तरिती और Lessee यह अवधारित कर सकेंगे कि Lessee आरक्षित प्रीमियम या भाटक का कौन से अनुपात में इस प्रकार अन्तरित भाग के लिए देय है और उनमें सहमत होने की दशा में ऐसी अवधारणा ऐसे किसी भी कोर्ट द्वारा किया जा सकेगा जो पट्टे पर दी गयी सम्पत्ति के कब्जे के लिए वाद को ग्रहण करने की अधिकारिता रखता हो।
लीज़ सम्पत्ति के एक अंश के क्रेता को यह अधिकार होगा कि वह उस अंश से, जिसे उसने क्रय किया है Lessee को निष्कासित कर दे। ऐसा करने से पट्टेदारी का विखण्डन नहीं होगा, पर एक सहभागीदार ऐसा नहीं कर सकेगा और न ही वह अपने हिस्से के किराए हेतु वाद संस्थित कर सकेगा। पट्टेदारों का विखण्डन सम्पदा और न ही किराये के सम्बन्ध में हो सकेगा और न ही किसी अन्य दायित्व के सम्बन्ध में एक सह स्वामी के एकपक्षीय कृत्य से, पर स्थिति तब भिन्न होगी जब सभी सह भागीदारों में वास्तविक विभाजन होता है तथा एक या अधिक सहभागीदार पट्टाधृति को अपने अपने अंश के रूप में प्राप्त करते हैं। पट्टाधृति के विभाजन की दशा में Lessee कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं होता है सिवाय इसके कि कथित विभाजन वास्तविक नहीं है, केवल मिथ्या है।