धारा 46 और 47 राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत आबकारी आयुक्त या मजिस्ट्रेट के तलाशी और गिरफ्तारी के अधिकार

Himanshu Mishra

25 Jan 2025 1:17 PM

  • धारा 46 और 47 राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 के तहत आबकारी आयुक्त या मजिस्ट्रेट के तलाशी और गिरफ्तारी के अधिकार

    राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 (Rajasthan Excise Act, 1950) राज्य में शराब और अन्य मादक पदार्थों (Intoxicants) के विनियमन के लिए एक व्यापक कानून है।

    इस अधिनियम की धारा 46 और 47 अधिकारियों को तलाशी और गिरफ्तारी के लिए विशिष्ट अधिकार प्रदान करती हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य अपराधों को रोकना, उनका पता लगाना और आबकारी कानूनों (Excise Laws) के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है।

    इस लेख में हम धारा 46 और 47 का विस्तार से अध्ययन करेंगे। हम इनके उद्देश्य, दायरे और उपयोग को समझेंगे, साथ ही इसे उदाहरणों (Illustrations) के माध्यम से सरल बनाएंगे।

    धारा 46: आबकारी आयुक्त (Excise Commissioner) या मजिस्ट्रेट द्वारा वारंट जारी करने का अधिकार

    धारा 46 आबकारी आयुक्त, मजिस्ट्रेट और अधिकृत आबकारी अधिकारियों (Empowered Excise Officers) को तलाशी और गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने का अधिकार देती है। यह प्रावधान अधिनियम के तहत अपराधों को रोकने और अपराधियों पर कार्रवाई करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है।

    अगर आबकारी आयुक्त, मजिस्ट्रेट, या एक अधिकृत अधिकारी को विश्वास हो कि इस अधिनियम के तहत कोई अपराध हुआ है, हो रहा है, या होने की संभावना है, तो वे दो प्रकार के वारंट जारी कर सकते हैं।

    पहले प्रकार का वारंट किसी स्थान की तलाशी के लिए जारी किया जा सकता है, जहां अधिकारी को विश्वास हो कि अपराध से संबंधित कोई भी वस्तु, जैसे मादक पदार्थ, उपकरण (Implements), या सामग्री (Materials) छिपाई या रखी गई है।

    उदाहरण के लिए, अगर आबकारी आयुक्त को सूचना मिलती है कि एक गोदाम में अवैध शराब (Illicit Liquor) रखी गई है, तो वह उस गोदाम की तलाशी के लिए वारंट जारी कर सकते हैं।

    दूसरे प्रकार का वारंट किसी ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए जारी किया जा सकता है, जो अपराध में शामिल होने का संदेहास्पद (Suspected) हो। जैसे, अगर मजिस्ट्रेट को सूचना मिलती है कि एक व्यक्ति नकली शराब (Counterfeit Liquor) बनाने में शामिल है, तो वे उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी कर सकते हैं।

    धारा 47: आबकारी अधिकारी (Excise Officer) को बिना वारंट के तलाशी का अधिकार

    जहां धारा 46 अधिकारिक अनुमति (Official Authorization) पर जोर देती है, वहीं धारा 47 उन स्थितियों को संबोधित करती है जहां तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो। यह प्रावधान कुछ विशेष आबकारी अधिकारियों को बिना वारंट तलाशी लेने का अधिकार देता है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ।

    धारा 47(1) के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित रैंक (Prescribed Rank) का एक आबकारी अधिकारी किसी स्थान पर बिना वारंट तलाशी कर सकता है, अगर उसे विश्वास हो कि उस स्थान पर इस अधिनियम के तहत कोई अपराध हुआ है, हो रहा है, या होने की संभावना है। यह प्रावधान तब लागू होता है जब वारंट प्राप्त करने से अपराधी को भागने या सबूत छिपाने का मौका मिल सकता है।

    हालांकि, इस धारा के तहत तलाशी शुरू करने से पहले अधिकारी को अपने विश्वास के आधार दर्ज करने होते हैं। उदाहरण के लिए, अगर एक आबकारी अधिकारी देखता है कि एक सुनसान फैक्ट्री में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं, तो वह बिना वारंट के उस स्थान की तलाशी ले सकता है।

    धारा 46 और 47 के बीच अंतर

    हालांकि दोनों धाराएं तलाशी और गिरफ्तारी से संबंधित हैं, लेकिन उनके उपयोग और दायरे में बड़ा अंतर है। धारा 46 वारंट के माध्यम से कार्यवाही पर जोर देती है, जबकि धारा 47 आपातकालीन परिस्थितियों (Emergency Situations) में बिना वारंट कार्यवाही की अनुमति देती है।

    धारा 46 न्यायिक नियंत्रण (Judicial Oversight) सुनिश्चित करती है, जबकि धारा 47 अधिकारियों को पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उनके विश्वास का रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी देती है।

    उदाहरणों के माध्यम से समझना

    1. वारंट के आधार पर तलाशी और गिरफ्तारी (धारा 46)

    मान लीजिए कि एक मजिस्ट्रेट को सूचना मिलती है कि एक फार्महाउस में अवैध रूप से बनी शराब रखी गई है। धारा 46 के तहत, मजिस्ट्रेट तलाशी के लिए वारंट जारी करते हैं। तलाशी के दौरान, अधिकारियों को शराब के ड्रम मिलते हैं और वे संपत्ति के मालिक को गिरफ्तार कर लेते हैं।

    2. बिना वारंट के तलाशी (धारा 47)

    एक आबकारी अधिकारी रात के समय एक सुनसान क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियां देखता है। वह तुरंत उस स्थान पर तलाशी लेता है और अंदर अवैध शराब बनाने का उपकरण (Equipment) और सामग्री पाता है। अधिकारी उन वस्तुओं को जब्त कर लेता है और वहां मौजूद लोगों को गिरफ्तार करता है।

    राजस्थान आबकारी अधिनियम, 1950 की धारा 46 और 47 मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों को रोकने और नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये प्रावधान अधिकारियों को समय पर और उचित कार्रवाई करने का अधिकार देती हैं।

    जहां धारा 46 वारंट आधारित कार्यवाही के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) को सुनिश्चित करती है, वहीं धारा 47 अधिकारियों को आपातकालीन परिस्थितियों में कार्रवाई करने की लचीलापन (Flexibility) देती है। इन प्रावधानों के उचित कार्यान्वयन (Implementation) से आबकारी कानूनों की प्रभावशीलता बनी रहती है और सरकारी राजस्व की रक्षा होती है।

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