भरण-पोषण मामले में हाईकोर्ट ने 80 वर्षीय महिला की याचिका खारिज की, कहा- स्टूडेंट पोती से ऐसी मांग करना अनुचित

Amir Ahmad

8 Sept 2026 12:11 PM IST

  • भरण-पोषण मामले में हाईकोर्ट ने 80 वर्षीय महिला की याचिका खारिज की, कहा- स्टूडेंट पोती से ऐसी मांग करना अनुचित

    केरल हाईकोर्ट ने कहा कि पढ़ाई कर रही और शिक्षा के लिए कर्ज ले रही पोती से अपनी पेंशन पाने वाली दादी का भरण-पोषण करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने 80 वर्षीय महिला की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें उसने अपनी बहू और पोती से भरण-पोषण दिलाने की मांग की थी।

    जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बहू पर सास के भरण-पोषण का दायित्व नहीं है। कोर्ट ने पोती को भी इस मामले में भरण-पोषण के लिए बाध्य मानने से इनकार किया।

    महिला के बेटे की केरल राज्य विद्युत बोर्ड में वरिष्ठ अधीक्षक के पद पर सेवा के दौरान मृत्यु हो गई। इसके बाद महिला ने अपनी बहू और पोती के खिलाफ अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू कर उनसे हर महीने 15 हजार रुपये भरण-पोषण की मांग की।

    भरण-पोषण अधिकरण ने पाया कि महिला को उसके बेटे की मृत्यु के बाद केरल राज्य विद्युत बोर्ड से मिलने वाले लाभों में से एक-तिहाई के रूप में 12 लाख रुपये से अधिक राशि मिल चुकी थी। इसके आधार पर अधिकरण ने उसकी याचिका बंद की। महिला की अपील भी खारिज हो गई, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    महिला की ओर से दलील दी गई कि उसे अपनी बहू को मिल रही मासिक फैमिली पेंशन में हिस्सा मिलना चाहिए और बहू तथा पोती दोनों पर उसका भरण-पोषण करने का कानूनी दायित्व है। दूसरी ओर, बहू और पोती की ओर से बताया गया कि महिला खुद अपनी सेवा पेंशन के साथ अपने दिवंगत पति की पेंशन भी प्राप्त कर रही है।

    हाईकोर्ट ने अधिनियम की धारा 2 में 'बच्चे' और 'रिश्तेदार' की परिभाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि बहू इस कानून के तहत महिला का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य नहीं है। पोती के संबंध में भी अदालत ने उसकी परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना।

    जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा,

    “दूसरी प्रतिवादी केवल छात्रा है और कर्ज लेकर पढ़ाई कर रही है। ऐसे में दादी से ऐसी अनुचित मांग की उम्मीद नहीं की जाती।”

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत सास अपनी बहू को मिल रही फैमिली पेंशन में हिस्सा मांगने की हकदार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि महिला का फैमिली पेंशन पर कोई अलग कानूनी दावा है तो उसके लिए उसे किसी अन्य उचित कानूनी उपाय का सहारा लेना होगा।

    हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित कानून में बहू को मिल रही फैमिली पेंशन के वितरण का ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और महिला इस कानून के तहत इसे हासिल नहीं कर सकती।

    अदालत ने महिला को कोई राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज की।

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