शादीशुदा महिला खुद होटल गई तो केवल शादी के वादे को यौन संबंध की वजह नहीं माना जा सकता: केरल हाईकोर्ट
Amir Ahmad
8 Sept 2026 12:03 PM IST

केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में शादीशुदा महिला से यौन संबंध बनाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत दर्ज आपराधिक मामला रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि यदि एक विवाहित महिला अपनी इच्छा से किसी दूसरे पुरुष के साथ होटल के कमरे में जाती है और उसके साथ यौन संबंध बनाती है तो केवल शादी के वादे के आरोप के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि उसकी सहमति सिर्फ उसी वादे से हासिल की गई।
जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने कहा कि जब महिला का विवाह कायम है और वह स्वेच्छा से आरोपी के साथ होटल गई तो उपलब्ध सामग्री से यह नहीं माना जा सकता कि यौन संबंध के लिए उसकी सहमति शादी के किसी झूठे वादे या किसी अन्य धोखे के कारण बनी थी। इसलिए धारा 69 के तहत अपराध के आवश्यक तत्व सामने नहीं आते।
मामले में आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को शादी का झूठा भरोसा दिया। इसके बाद उसे होटल ले गया और उसके खाने में कथित तौर पर नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ यौन संबंध बनाए। यह भी आरोप था कि आरोपी ने महिला की नग्न तस्वीरें खींचीं और उन्हें उसके व्हाट्सऐप पर भेजा।
आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 69 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ई के तहत मामला दर्ज किया गया।
बाद में आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच विवाद सुलझ गया। दोनों ने आपसी सहमति से मामला खत्म करने की मांग की। शिकायतकर्ता ने भी अदालत में इस संबंध में बयान दिया, जबकि सरकारी वकील ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है।
हाईकोर्ट ने हालांकि कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए इन्हें केवल निजी विवाद मानकर समझौते के आधार पर मामला खत्म नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसके बाद मामले के तथ्यों और आरोपों की कानूनी स्थिति की जांच की।
अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता का विवाह पहले से कायम था और वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ होटल के कमरे में गई। ऐसे में केवल शादी के कथित वादे के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि यौन संबंध के लिए उसकी सहमति पूरी तरह उसी वादे से प्रेरित थी।
कोर्ट ने कहा,
“ऐसी परिस्थितियों में यह नहीं कहा जा सकता कि यौन संबंध के लिए सहमति शादी के किसी झूठे वादे या किसी अन्य धोखापूर्ण तरीके से प्रेरित हुई।”
हाईकोर्ट ने माना कि शिकायत में लगाए गए आरोपों को सही मानकर भी BNS की धारा 69 के तहत अपराध के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते। साथ ही, दोनों पक्षों के बीच समझौते और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि मुकदमे में दोषसिद्धि की संभावना भी बहुत कम है।
इन परिस्थितियों में जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द की।


