थप्पड़ मारने के बाद गिरने से हुई पत्नी की मौत: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पति की हत्या की सजा गैर-इरादतन हत्या में बदली

  • थप्पड़ मारने के बाद गिरने से हुई पत्नी की मौत: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पति की हत्या की सजा गैर-इरादतन हत्या में बदली

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में पति को मिली सजा को बदलते हुए हत्या के अपराध को गैर-इरादतन हत्या माना। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि पति के थप्पड़ मारने के बाद गिरने से पत्नी के सिर पर लगी चोट सामान्य परिस्थितियों में मौत का कारण बनने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, पति को इस बात का ज्ञान था कि उसके कृत्य से पत्नी की मौत हो सकती है।

    जस्टिस मोहम्मद नवाज और जस्टिस बी. प्रमोद की खंडपीठ ने आरोपी पति की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या की सजा को धारा 304 भाग-दो के तहत गैर-इरादतन हत्या में बदल दिया। हाईकोर्ट ने इस अपराध के लिए पति को 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि पत्नी के साथ घरेलू क्रूरता के मामले में IPC की धारा 498ए के तहत उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी।

    कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से पता चलता है कि घटना घरेलू विवाद के दौरान हुई थी। झगड़े के दौरान आरोपी ने पत्नी को थप्पड़ मारा, जिसके बाद वह नीचे गिर गई। मेडिकल साक्ष्यों के अनुसार, महिला के सिर के बाईं ओर कनपटी और पार्श्विका क्षेत्र में सूजन थी।

    पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की गवाही का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि महिला को लगी चोट सामान्य परिस्थितियों में मौत का कारण बनने के लिए पर्याप्त थी। हालांकि, आरोपी को यह जानकारी थी कि उसके इस कृत्य से पत्नी की मौत होने की आशंका थी। इसी आधार पर कोर्ट ने माना कि उसका अपराध हत्या के बजाय हत्या की श्रेणी में नहीं आने वाली गैर-इरादतन हत्या है।

    मामले के अनुसार, आरोपी और मृतका ने प्रेम विवाह किया था और उनके दो बच्चे हैं। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि पत्नी को थायरॉयड की गंभीर बीमारी होने के बावजूद पति उस पर काम पर जाने के लिए लगातार दबाव डालता था और उसे परेशान करता था।

    एक अप्रैल 2016 को घर में घरेलू विवाद के बाद पति ने पत्नी के साथ मारपीट की, जिसके चलते वह बेहोश होकर गिर पड़ी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया।

    मृतका के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 498ए, 304बी और 302 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया। ट्रायल कोर्ट ने उसे धारा 498ए और 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

    इस फैसले को चुनौती देते हुए पति ने हाईकोर्ट में अपील की। उसने दलील दी कि पत्नी को थायरॉयड और हृदय संबंधी समस्याएं थीं और गिरने के कारण उसे घातक चोट लगी। आरोपी ने यह भी कहा कि पत्नी को अस्पताल ले जाना उसकी बेगुनाही दर्शाता है।

    हाईकोर्ट ने हत्या के आरोप में दोषसिद्धि बदलते हुए आरोपी की सजा 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने में संशोधित की, जबकि घरेलू क्रूरता के अपराध में उसकी दोषसिद्धि कायम रखी।


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