BJP के प्रदर्शन में 'पाकिस्तान जिंदाबाद' नारा लगने की संभावना कम: कर्नाटक हाईकोर्ट ने केस रद्द किया
Amir Ahmad
4 Nov 2026 8:49 PM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ सदस्यों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लगाने के मामले में लंबित आपराधिक मुकदमा रद्द किया।
जस्टिस वी. श्रीशानंद ने टिप्पणी की कि BJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों द्वारा 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लगाया जाना बेहद असंभव लगता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील को स्वीकार किया कि प्रदर्शन के दौरान नारे लगाने के क्रम में जुबान फिसल गई और 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' की जगह 'पाकिस्तान जिंदाबाद' कह दिया गया।
कोर्ट ने कहा,
“शुरुआत में ही यह बात बेहद कल्पना से परे लगती है कि भारतीय जनता पार्टी जैसी राजनीतिक पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लगाएंगे। इसी संदर्भ में याचिकाकर्ता की दलील पर विचार करना होगा कि नारे लगाने के दौरान गलती से 'मुर्दाबाद' की जगह 'जिंदाबाद' शब्द आ गया।”
कोर्ट डॉ. एस. रवि कुमार की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उन्होंने मांड्या के प्रिंसिपल सीनियर सिविल जज और सीजेएम के समक्ष लंबित मामले को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला मांड्या के वेस्ट पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153बी और 505(1)(बी) के तहत कन्नंबाड़ी कुमार नामक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किया गया।
शिकायत के अनुसार, 18 दिसंबर 2022 को बीजेपी सदस्यों ने प्रदर्शन आयोजित किया था, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर 'पाकिस्तान जिंदाबाद' का नारा लगाया। शिकायतकर्ता ने कहा कि इस नारे से उसे मानसिक परेशानी हुई और उसने कार्रवाई की मांग की।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नारा अनजाने में लगाया गया और इसका उद्देश्य समाज में अशांति पैदा करना नहीं था। यह भी कहा गया कि किसी विशेष समुदाय को प्रभावित करने की कोई मंशा नहीं थी। याचिकाकर्ता ने नारे को जुबान फिसलने का मामला बताते हुए आपराधिक मुकदमा रद्द करने की मांग की।
दूसरी ओर, राज्य ने दलील दी कि शिकायतकर्ता द्वारा दिया गया वीडियो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि 'पाकिस्तान जिंदाबाद' शब्द कहे गए, इसलिए जांच जारी रहनी चाहिए। राज्य ने यह भी कहा कि प्रदर्शन पाकिस्तान के विदेश मंत्री द्वारा दिए गए एक आपत्तिजनक बयान के विरोध में आयोजित किया गया और याचिकाकर्ता ने समाज में अशांति पैदा करने के लिए यह नारा लगाया।
हालांकि, कोर्ट ने गौर किया कि शिकायत केवल वीडियो के आधार पर दर्ज की गई और वह भी घटना के दो साल बाद। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान नहीं कर सकी और न ही यह पता लगा सकी कि नारे लगाए जाने से कोई प्रतिक्रिया या परिणाम सामने आया था या नहीं।
इन परिस्थितियों में कोर्ट ने माना कि आपराधिक कार्यवाही जारी रखना अनावश्यक होगा और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि IPC की धारा 505 के तहत अभियोजन शुरू करने से पहले आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई। इन आधारों पर हाईकोर्ट ने आपराधिक मामला रद्द करने का फैसला किया।

