बसवकल्याण हिंदू सम्मेलन को हाईकोर्ट की मंजूरी, लेकिन स्वामी अदृश्य कादेश्वर को भाषण देने पर रोक
Amir Ahmad
25 Jun 2026 3:25 PM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 28 जून को प्रस्तावित बसवादी शिव शरण बृहत हिंदू समावेश कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में आमंत्रित कनेरी मठ के स्वामी अदृश्य कादेश्वर किसी भी प्रकार का भाषण नहीं दे सकेंगे।
कलबुर्गी खंडपीठ में सुनवाई कर रहे जस्टिस एस. आर. कृष्णकुमार ने बसवकल्याण तहसीलदार के 11 जून के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके जरिए कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार किया गया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि स्वामी अदृश्य कादेश्वर कार्यक्रम में शारीरिक रूप से उपस्थित रह सकते हैं और उसमें भाग भी ले सकते हैं, लेकिन वे स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से कोई भाषण नहीं देंगे। साथ ही कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की संख्या अधिकतम 2,500 तक सीमित रहेगी।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम के बाद किसी प्रकार का जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी।
अदालत ने कहा कि उपलब्ध पुलिस बल को ध्यान में रखते हुए यह शर्त आवश्यक है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कई सख्त शर्तें भी लगाईं।
आदेश में कहा गया कि कार्यक्रम के दौरान कोई भी व्यक्ति नफरत फैलाने वाला भाषण, भड़काऊ बयान या ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। इसके अलावा किसी राजनीतिक नेता, धार्मिक गुरु, धार्मिक समुदाय या जातीय समूह के खिलाफ अपमानजनक भाषा, नारेबाजी या टिप्पणी की भी अनुमति नहीं होगी।
याचिका 'समावेश उत्सव समिति' के अध्यक्ष की ओर से दायर की गई। याचिका में तहसीलदार के उस निर्णय को चुनौती दी गई, जिसमें 28 जून को अक्कमहादेवी कॉलेज परिसर या बसवेश्वर आईटीआई सभागार में प्रस्तावित सम्मेलन और जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया।
राज्य सरकार ने अनुमति न देने के पीछे यह तर्क दिया कि स्वामी अदृश्य कादेश्वर पर पहले लिंगायत समुदाय और बसव अनुयायियों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां करने के आरोप लग चुके हैं। इन बयानों के कारण विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध भी दर्ज कराया गया।
सुनवाई के दौरान एडवोकेट जरनल शशिकिरण शेट्टी ने अदालत को बताया कि स्वामी के आगमन और भाषण से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी के खिलाफ लिंगायत समुदाय के संबंध में कथित मानहानिकारक बयान देने पर अंतरिम रोक का आदेश भी प्रभावी है।
अदालत के 18 जून के निर्देश के बाद आयोजक समिति और कनेरी मठ के स्वामी ने अलग-अलग शपथपत्र दाखिल कर आश्वासन दिया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया जाएगा और कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
इन आश्वासनों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि राज्य सरकार की प्रमुख आशंकाओं का पर्याप्त समाधान हो गया।
इसके बाद अदालत ने केवल सम्मेलन आयोजित करने की अनुमति दी, जबकि जुलूस की मांग को स्वीकार नहीं किया।
मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई 2026 को होगी।

