2020 बेंगलुरु दंगा मामला: साढ़े पांच साल जेल में रहने के बाद आरोपी फैरोज पाशा को कर्नाटक हाईकोर्ट से जमानत
Amir Ahmad
9 July 2026 1:37 PM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के बेंगलुरु दंगा मामले में आरोपी फैरोज पाशा को जमानत दी।
कोर्ट ने कहा कि पाशा पिछले साढ़े पांच वर्षों से न्यायिक हिरासत में है और इसी मामले के कई सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समानता के सिद्धांत के आधार पर उसे भी जमानत दी जानी चाहिए।
जस्टिस मोहम्मद नवाज और जस्टिस जी. बसवराज की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी 12 अगस्त 2020 से जेल में है। आरोपपत्र में 267 गवाहों का उल्लेख किया गया और मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। ऐसे में लंबे समय से जेल में रहने और सह-आरोपियों को मिली जमानत को देखते हुए उसे राहत दी जा सकती है।
कोर्ट ने कहा,
"समान परिस्थिति वाले अन्य आरोपियों को, जिन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत भी आरोप हैं, इस हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। आरोपी साढ़े पांच वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है। मुकदमे के पूरा होने में काफी समय लग सकता है। ऐसे में समानता के सिद्धांत के आधार पर उसकी जमानत याचिका स्वीकार की जा सकती है।"
खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपपत्र में शामिल आरोपी संख्या 4, 6, 9, 12 से 18 और 20 से 24 तक को विभिन्न मामलों में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। फैरोज पाशा इस मामले में आरोपी संख्या 19 है।
मामला
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार 11 अगस्त 2020 को बेंगलुरु के डीजे हॉलि और केजी हॉलि थाना क्षेत्रों में हुई हिंसा के पीछे कथित रूप से फैरोज पाशा की भूमिका थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद एक पूर्व कांग्रेस विधायक के भतीजे ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट साझा की, जिसके बाद हिंसा भड़क गई।
आरोप है कि 200 से 300 लोगों की भीड़ ने डीजे हॉलि थाने के पास पुलिसकर्मियों पर हमला किया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कई वाहनों में आग लगाई। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी।
शुरुआत में मामला डीजे हॉलि थाने में दर्ज हुआ था लेकिन 21 सितंबर 2020 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जांच अपने हाथ में ले ली। आरोपपत्र में 109 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें 24 लोगों पर UAPA के तहत भी आरोप लगाए गए।
फरवरी 2026 में विशेष अदालत ने पाशा की जमानत याचिका खारिज की थी। अदालत ने माना था कि प्रथम दृष्टया उसके खिलाफ लगाए गए आरोप सही प्रतीत होते हैं और उसने कथित साजिश के तहत भड़काऊ सामग्री प्रसारित कर दंगा भड़काने में भूमिका निभाई।
साथ ही अदालत ने कहा था कि इस कानून की धारा 43डी(5) के कारण जमानत देने पर कानूनी रोक भी लागू होती है।
हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए पाशा को जमानत दी।
कोर्ट ने जमानत के लिए कई शर्तें भी लगाई हैं। इनमें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करना, वर्तमान आवासीय पता पुलिस को बताना और उसमें किसी भी बदलाव की सूचना देना, गवाहों या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करना तथा मुकदमे की सुनवाई में पूरा सहयोग करना शामिल है।


