ED की तलाशी और बैंक अकाउंट फ्रीज करने की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
Amir Ahmad
5 Aug 2026 7:39 PM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई तलाशी और संपत्ति या बैंक अकाउंट फ्रीज करने की कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 226 तथा दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528) के तहत हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने गेमिंग कंपनी गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज की याचिका पर सुनवाई करते हुए ED की प्रारंभिक आपत्ति खारिज की। कंपनी ने 23 फरवरी को दर्ज ECIR के आधार पर अपने बैंक अकाउंट और निवेश को फ्रीज किए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी थी।
ED का तर्क था कि PMLA की धारा 17(1A) के तहत संपत्ति फ्रीज करने की कार्रवाई पूरी तरह दीवानी प्रकृति की, इसलिए इसे अनुच्छेद 226 और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि धारा 17(1A) के तहत की जाने वाली तलाशी और फ्रीज करने की कार्रवाई कोई स्वतंत्र दीवानी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ECIR के माध्यम से शुरू हुई धन शोधन की आपराधिक जांच का ही हिस्सा है।
अदालत ने कहा,
"जब धन शोधन के अपराध की जांच लंबित होती है, तब धारा 17(1A) के तहत की गई तलाशी और फ्रीज करने की कार्रवाई को केवल दीवानी प्रकृति की नहीं माना जा सकता। इसलिए ECIR से उत्पन्न तलाशी और जब्ती की कार्रवाई को अनुच्छेद 226 तथा धारा 482 के तहत चुनौती देना पूरी तरह से स्वीकार्य है।"
पीठ ने कहा कि PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी, जब्ती और संपत्ति फ्रीज करने की शक्तियां धन शोधन अपराध की जांच से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई हैं, इसलिए उन्हें केवल दीवानी कार्रवाई नहीं माना जा सकता।
इस निर्णय के साथ हाईकोर्ट ने ED की प्रारंभिक आपत्ति खारिज की और अब मामले की सुनवाई याचिकाओं के गुण-दोष के आधार पर की जाएगी।
मामला गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज, केएन सपोर्ट सर्विसेज, केवर्क्स टेक्नोलॉजीज, विमो टेक्नोलॉजीज और रम्मीकल्चर टेक्नोलॉजीज द्वारा दायर याचिकाओं से संबंधित है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 22 जनवरी को गेम्सक्राफ्ट के खिलाफ ED की जांच पर रोक लगाई थी। अदालत ने कहा था कि मूल अपराध से संबंधित FIR में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद नवंबर 2025 की ECIR का आधार समाप्त हो गया था। इसके बाद ED ने 23 फरवरी को तेलंगाना में दर्ज तीन नई FIR के आधार पर नई ECIR दर्ज की और उसी के आधार पर कंपनी के बैंक अकाउंट तथा निवेश फ्रीज कर दिए।
इससे पहले 18 जून को हाईकोर्ट ने गेम्सक्राफ्ट के तीन निदेशकों विकास तनेजा, दीपक सिंह और पृथ्वीराज सिंह की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया था। अदालत ने उस समय ED की इस आधार पर आलोचना की थी कि उसने पुराने ECIR को नए मामले के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया।


