RSS पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामला रद्द कराने कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचे प्रियांक खड़गे

  • RSS पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामला रद्द कराने कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचे प्रियांक खड़गे

    कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी कथित टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक मानहानि की कार्यवाही रद्द कराने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने बेंगलुरु की सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत के 27 जून 2026 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनके और कांग्रेस विधायक मोहम्मद हारिस नलपाड के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत संज्ञान लिया गया।

    खड़गे ने हाईकोर्ट से संज्ञान लेने वाले आदेश के साथ-साथ विशेष अदालत के समक्ष लंबित उससे जुड़ी सभी आगे की कार्यवाही रद्द करने की मांग की।

    यह मामला RSS के एक सदस्य की निजी शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अक्टूबर 2025 में खड़गे ने सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य सार्वजनिक बयानों के माध्यम से RSS और उसके सदस्यों के बारे में कथित रूप से मानहानिकारक टिप्पणियां की थीं। शिकायत में कांग्रेस विधायक मोहम्मद हारिस नलपाड से जुड़ी कथित टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया।

    विशेष अदालत ने 27 जून को खड़गे और नलपाड के खिलाफ संज्ञान लिया, जबकि कर्नाटक के पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही समाप्त की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि खड़गे की कुछ टिप्पणियों, जिनमें RSS की गतिविधियों से जुड़ी बातें भी शामिल थीं से संगठन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

    खड़गे ने इन आरोपों से इनकार किया।

    ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही आगे बढ़ने के बाद 29 अगस्त को विशेष अदालत ने खड़गे और नलपाड को जमानत दी थी। अदालत ने माना था कि BNS की धारा 356 के तहत आरोपित अपराध जमानती है। दोनों आरोपियों ने आरोपों से इनकार करते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही थी। इसके बाद मामले को शिकायतकर्ता के साक्ष्य दर्ज करने के लिए रखा गया।

    19 सितंबर को विशेष अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 317 के तहत खड़गे और नलपाड को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने से छूट दी। शिकायतकर्ता को साक्ष्य पेश करने का अंतिम अवसर दिया गया और मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर के लिए तय की गई।

    अब खड़गे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने की मांग की। याचिका में यह भी कहा गया कि वह अपने वकील के माध्यम से अदालत में पेश होते रहे हैं और व्यक्तिगत रूप से ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होने में उन्हें कठिनाई होती है, क्योंकि उनका सामान्य निवास केरल में है।

    हाईकोर्ट फिलहाल विशेष अदालत द्वारा संज्ञान लिए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रहा है। इस चरण पर हाईकोर्ट के समक्ष सवाल आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से जुड़ा है। याचिका पर सुनवाई का मतलब यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने कथित टिप्पणियों को मानहानि माना है या नहीं, इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष दिया।

    खड़गे और नलपाड के खिलाफ कार्यवाही 27 जून के संज्ञान आदेश के आधार पर चल रही है। विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ प्रथमदृष्टया आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सामग्री पाई थी जबकि दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

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