POCSO मामले में वचनानंद स्वामी की अग्रिम जमानत रद्द, कर्नाटक हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश पर जताई गंभीर आपत्ति

Amir Ahmad

26 Jun 2026 5:37 PM IST

  • POCSO मामले में वचनानंद स्वामी की अग्रिम जमानत रद्द, कर्नाटक हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के आदेश पर जताई गंभीर आपत्ति

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने POCSO के तहत दर्ज मामले में वचनानंद स्वामी को सेशन कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत रद्द की। अदालत ने कहा कि जिस तरीके से अग्रिम जमानत दी गई, वह गंभीर चिंता का विषय है।

    जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने शिकायतकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए 2 मई को सेशन कोर्ट द्वारा पारित अग्रिम जमानत का आदेश निरस्त किया। वचनानंद स्वामी के खिलाफ POCSO Act की विभिन्न धाराओं के तहत अप्राकृतिक यौन शोषण सहित गंभीर आरोप दर्ज हैं।

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल आरोपपत्र दाखिल हो जाने के कारण अग्रिम जमानत समाप्त नहीं होती, लेकिन इस मामले में जमानत दिए जाने की प्रक्रिया ही अदालत के लिए चिंता का विषय है।

    अदालत ने कहा,

    “जिस तरीके से गिरफ्तारी से पहले जमानत दी गई, वही इस अदालत को परेशान करता है। शिकायत दर्ज होने से एक सप्ताह पहले ही POCSO Act की धाराओं के तहत अग्रिम जमानत दी गई। आदेश को निरस्त करने का आधार आरोपपत्र दाखिल होना नहीं, बल्कि जमानत दिए जाने का तरीका और अपराध की प्रकृति है।”

    हालांकि, हाईकोर्ट ने वचनानंद स्वामी को नियमित जमानत के लिए संबंधित अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी। अदालत ने निर्देश दिया कि वह तीन सप्ताह के भीतर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि अभी तक अग्रिम जमानत प्रभावी है और आरोपी को हिरासत में नहीं लिया गया, इसलिए तीन सप्ताह तक अग्रिम जमानत जारी रहेगी। इस अवधि में यदि नियमित जमानत का आवेदन दाखिल किया जाता है तो संबंधित अदालत उस पर शीघ्र निर्णय ले।

    सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि वचनानंद स्वामी पर शिकायतकर्ता को धमकाने के आरोप में पहले ही FIR दर्ज हो चुकी है, इसलिए उनके खिलाफ कड़ी शर्तें लगाई जानी चाहिए।

    वहीं, वचनानंद स्वामी की ओर से दलील दी गई कि नियमित जमानत आवेदन पर सुनवाई करते समय संबंधित अदालत हाईकोर्ट की मौजूदा टिप्पणियों से प्रभावित न हो।

    इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित अदालत नियमित जमानत आवेदन पर केवल मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला करेगी और वर्तमान आदेश में की गई टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होगी।

    सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक बी. एन. जगदीश ने यह भी तर्क दिया कि सेशन कोर्ट को अग्रिम जमानत देने से पहले पीड़ित पक्ष को सुनवाई का अवसर देना चाहिए।

    इस पर हाईकोर्ट ने कहा,

    “इसके अतिरिक्त, केवल यह तथ्य कि POCSO जैसे मामले में पीड़ित को सुना ही नहीं गया, भी जमानत आदेश को निरस्त करने का एक स्वतंत्र आधार है।”

    इन टिप्पणियों के साथ कर्नाटक हाईकोर्ट ने सत्र अदालत द्वारा वचनानंद स्वामी को दी गई अग्रिम जमानत रद्द की।

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